April 18, 2026

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बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रिया हुई आसान

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बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रिया हुई आसान

निर्मला सीतारमण ने पेश किया लगातार नौवां बजट, विदेश यात्रा और पढ़ाई के लिए टीसीएस में कटौती कर दी बड़ी राहत, आईटीआर भरने के नियमों में भी हुआ सुधार।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट 2026-27 पेश किया। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की नजरें इस बार भी इनकम टैक्स स्लैब पर टिकी थीं, लेकिन सरकार ने टैक्स की दरों और मौजूदा स्लैब में किसी भी तरह का बदलाव न करने का निर्णय लिया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्षों में किए गए व्यापक सुधारों के बाद वर्तमान टैक्स ढांचा स्थिर है, इसलिए पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाएं पहले की तरह ही प्रभावी रहेंगी। हालांकि, स्लैब में राहत न मिलने के बावजूद टैक्स भरने की जटिल प्रक्रियाओं को कम करने और अनुपालन (Compliance) को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। सरकार का मुख्य ध्यान अब टैक्स चोरी रोकने और ईमानदार टैक्सपेयर्स को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर है।

रिटर्न फाइलिंग की समयसीमा में विस्तार और नया ढांचा

बजट 2026 में सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की समयसीमा को लेकर किया गया है। अब टैक्सपेयर्स को अपने संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। पहले इसके लिए अंतिम तारीख 31 दिसंबर निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। इसके लिए केवल एक मामूली शुल्क देना होगा, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जिनसे रिटर्न भरते समय कोई मानवीय त्रुटि हो गई थी।

इसके साथ ही, सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की तारीखों को व्यवस्थित किया है:

  • आईटीआर-1 और आईटीआर-2: सामान्य वेतनभोगी वर्ग के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी।

  • गैर-ऑडिट वाले व्यवसाय और ट्रस्ट: इनके लिए समयसीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया है।

आम आदमी और एनआरआई के लिए विशेष छूट

वित्त मंत्री ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए घोषणा की है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज को अब पूरी तरह आयकर मुक्त रखा जाएगा। इतना ही नहीं, इस राशि पर अब कोई टीडीएस (TDS) भी नहीं कटेगा। यह उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो पहले से ही किसी दुर्घटना की त्रासदी झेल रहे हैं।

वहीं, भारतीय उद्योगों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से सरकार ने विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया है। भारत की कंपनियों को महत्वपूर्ण पूंजीगत सामान (Capital Goods) उपलब्ध कराने वाले एनआरआई (Non-Resident Indians) को अब 5 साल तक आयकर में विशेष छूट दी जाएगी। इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

विदेश यात्रा और शिक्षा हुई सस्ती: टीसीएस में भारी कटौती

पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में बजट ने बड़ी खुशखबरी दी है। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश यात्रा और पढ़ाई के खर्चों पर लगने वाले टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दरों में कटौती का प्रस्ताव है।

  1. विदेशी टूर पैकेज: अभी तक इस पर 5% और 20% की दर से टीसीएस लगता था, जिसे घटाकर अब सीधे 2% कर दिया गया है। इसमें अब न्यूनतम राशि की कोई सीमा भी नहीं रहेगी।

  2. शिक्षा और इलाज: विदेश में पढ़ाई या चिकित्सा उपचार के लिए भेजे जाने वाले पैसे पर भी टीसीएस को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इस कदम से विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के अभिभावकों का वित्तीय बोझ कम होगा।

शेयर बाजार पर टैक्स का बोझ बढ़ा

एक तरफ जहां आम आदमी को प्रक्रियागत राहत दी गई है, वहीं शेयर बाजार के निवेशकों के लिए खबर थोड़ी चिंताजनक हो सकती है। सरकार ने सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने और राजस्व बढ़ाने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।

  • फ्यूचर्स (Futures): एसटीटी को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% किया गया है।

  • ऑप्शंस (Options): एसटीटी को 0.01% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इस बदलाव का सीधा असर उन ट्रेडर्स पर पड़ेगा जो बाजार में भारी वॉल्यूम के साथ इंट्राडे या डेरिवेटिव ट्रेडिंग करते हैं।

डिजिटल सुधार और ऑटोमैटिक सिस्टम

छोटे टैक्सपेयर्स की सुविधा के लिए अब एक ‘ऑटोमैटिक सिस्टम’ लागू किया जाएगा। अब कम टैक्स कटौती या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट (Lower TDS Certificate) प्राप्त करने के लिए टैक्स अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और स्वचालित होगी।

साथ ही, निवेशकों के लिए फॉर्म 15जी (15G) और 15एच (15H) जमा करना आसान हो गया है। यदि किसी निवेशक के पास अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं, तो उसे हर कंपनी को अलग से फॉर्म नहीं भेजना होगा। वह सीधे अपने ‘डिपॉजिटरी’ में यह फॉर्म जमा कर सकेगा, जो इसे संबंधित कंपनियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएगी।

जनहित का नजरिया और निष्कर्ष

बजट 2026 यह संकेत देता है कि सरकार अब टैक्स की दरों को स्थिर रखकर व्यवस्था के सरलीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि मध्यम वर्ग एक बड़ी टैक्स छूट की उम्मीद कर रहा था, लेकिन टीसीएस दरों में कमी और रिटर्न संशोधन की तारीख बढ़ाना व्यावहारिक रूप से काफी मददगार साबित होगा।

विशेष रूप से विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों और दुर्घटना पीड़ितों को दी गई राहत सराहनीय है। शेयर बाजार पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने संकेत दिया है कि वह सुरक्षित निवेश को बढ़ावा देना चाहती है। कुल मिलाकर, यह बजट ‘टैक्स सुधार’ से ज्यादा ‘टैक्स प्रबंधन’ और ‘डिजिटल गवर्नेंस’ को समर्पित दिखता है।