चम्पावत: भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत चम्पावत जनपद में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जनपद की प्राचीन ज्ञान परंपरा, दुर्लभ पाण्डुलिपियों और बौद्धिक धरोहरों का प्रभावी संरक्षण करना है, जिससे इस ऐतिहासिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
उत्तराखण्ड शासन के मुख्य सचिव द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर जिलाधिकारी मनीष कुमार ने संबंधित विभागों को इस अभियान के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस राष्ट्रीय अभियान को निर्धारित समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न किया जाए।
इस सर्वेक्षण के दायरे में जिले के निजी एवं सरकारी पुस्तकालय, संग्रहालय, विभिन्न शिक्षण संस्थान, संस्कृत पाठशालाएं, मंदिर, मठ, आश्रम और गुरुकुल शामिल किए गए हैं। इन स्थानों पर मौजूद प्राचीन पाण्डुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ अभिलेखों का व्यापक स्तर पर चिन्हीकरण किया जाएगा। इसके बाद इन सभी दस्तावेजों का विधिवत सूचीकरण किया जाएगा ताकि इनका एक व्यवस्थित डेटाबेस तैयार हो सके।
सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप देने के लिए ज्ञान भारतम् एप (GYAN BHARATAM APP) का प्रयोग किया जाएगा। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि चम्पावत जिला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के कारण विशेष स्थान रखता है। यहाँ के स्थानीय पुरोहितों, धर्माचार्यों, ज्योतिषाचार्यों और विभिन्न विद्वानों के पास प्राचीन भाषाओं की दुर्लभ पाण्डुलिपियों के निजी संग्रह उपलब्ध होने की संभावना है, जिन्हें राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना आवश्यक है।
प्रशासन ने इस सर्वेक्षण अभियान को आगामी तीन माह की अवधि में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए संस्कृत और इतिहास विषयों के अध्यापकों, एन.एस.एस. एवं एन.सी.सी. के स्वयंसेवकों और ग्राम विकास अधिकारियों की सर्वेक्षक के तौर पर नियुक्ति की जाएगी। यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी संग्रहकर्ता की पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण केवल उनकी स्पष्ट सहमति के बाद ही किया जाएगा। इसके साथ ही पाण्डुलिपियों का स्वामित्व और मालिकाना हक पूरी तरह से उनके मूल संग्रहकर्ता के पास ही बना रहेगा।
जिलाधिकारी ने जनपद के नागरिकों से अपनी प्राचीन धरोहरों को सुरक्षित बनाने और उन्हें राष्ट्रीय ज्ञान कोष से जोड़ने के लिए इस अभियान में सहयोग देने का आग्रह किया है। इस पहल के माध्यम से जिले की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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