April 18, 2026

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बजट 2026: बुनियादी ढांचे और विकास पर सरकार का बड़ा दांव, शेयर बाजार में भारी गिरावट

Budget2026

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर एक नया इतिहास रच दिया है। लगातार नौवीं बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाने के साथ ही उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘पावर बूस्टर’ देने के लिए कई बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा की। सरकार ने इस बार अपना पूरा ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास (कैपिटल एक्सपेंडिचर), डिजिटल अर्थव्यवस्था और भविष्य की तकनीक जैसे सेमीकंडक्टर और एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) पर केंद्रित किया है। हालांकि, जहां एक तरफ सरकार ने विकास का रोडमैप तैयार किया, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार को बजट की घोषणाएं रास नहीं आईं। बजट भाषण के दौरान ही सेंसेक्स में 1000 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बावजूद इसके, राजकोषीय घाटे को 4.3% पर लाने का लक्ष्य भारत की वैश्विक क्रेडिट रेटिंग के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


पूरा घटनाक्रम और बजट की पृष्ठभूमि

यह बजट ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच अपनी स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। रविवार की छुट्टी के बावजूद शेयर बाजारों का खुला रहना इस दिन की महत्ता को दर्शाता है। निर्मला सीतारमण ने 85 मिनट के अपने भाषण में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए बड़ी राहतों का पिटारा खोला।

सरकार ने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) को पिछले साल के 11.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का फैसला किया है। यह 1 लाख करोड़ रुपये की सीधी बढ़ोतरी देश में नई सड़कों, पुलों और रेलवे लाइनों के जाल को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही, 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए राज्यों को करों में 41% की हिस्सेदारी बरकरार रखी गई है, जो सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने वाला कदम है।

बाजार की गिरावट के कारण और परिस्थितियाँ

बजट पेश होते ही शेयर बाजार में ‘लाल निशान’ छा गया। जानकारों का मानना है कि जिंस वायदा (Commodity Futures) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने और शेयरों की पुनर्खरीद (Buyback) पर पूंजीगत लाभ कर लगाने के प्रस्ताव ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। बाजार को उम्मीद थी कि व्यक्तिगत आयकर के स्लैब में कोई बहुत बड़ी राहत मिलेगी, लेकिन सरकार ने राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) बनाए रखने को प्राथमिकता दी। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.3% रखना यह दर्शाता है कि सरकार बाजार से कम उधार लेगी, जिससे भविष्य में ब्याज दरों में कमी आने की संभावना है, लेकिन तत्काल रूप से बाजार ने इसे “ठंडा बजट” माना।

जनता और पाठकों पर सीधा प्रभाव

इस बजट का आम आदमी पर मिला-जुला असर पड़ेगा। सबसे बड़ी राहत एनआरआई (NRI) और तकनीकी पेशेवरों को मिली है, जिनके लिए विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना शुरू की गई है। इससे विदेश में काम करने वाले भारतीयों को अपनी संपत्ति घोषित करने के लिए 6 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा और उन पर पुराना ब्याज या जुर्माना नहीं लगेगा।

वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए जिला अस्पतालों की क्षमता में 50% की वृद्धि करने और ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान (AIIA) स्वास्थ्य सेवाओं को और सुलभ बनाएंगे। छात्रों के लिए देश के हर जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास बनाने की घोषणा महिला शिक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

आगे क्या बदलेगा: भविष्य की तस्वीर

आने वाले समय में भारत में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ यानी रचनात्मक अर्थव्यवस्था का बोलबाला होगा। सरकार ने 2030 तक एवीजीसी (AVGC) क्षेत्र में 20 लाख पेशेवरों की जरूरत को देखते हुए 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में क्रिएटर लैब्स बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए भारत अब केवल चिप का उपयोग नहीं करेगा, बल्कि उनके उपकरणों और सामग्री का उत्पादन भी यहीं होगा।

पर्वतीय क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए ‘पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ पर्वतीय मार्ग’ विकसित करने की योजना पर्यटन और परिवहन के नजरिए से इन राज्यों की तस्वीर बदल देगी। साथ ही, मंदिरों और मठों के संरक्षण के लिए ‘बौद्ध सर्किट’ का विकास धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगा।

आम आदमी को क्या फायदा और क्या नुकसान

  • फायदा: बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। डिजिटल लेनदेन में यूपीआई (UPI) की रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बीच सरकार का बैंकिंग सुधारों पर जोर ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दिलाएगा।

  • असर: स्टील और सीमेंट क्षेत्र को मिले 20,000 करोड़ रुपये के प्रावधान से निर्माण लागत में स्थिरता आ सकती है। हालांकि, विदेशी पर्यटन पैकेज पर टीसीएस (TCS) की दर कम होने से विदेश घूमना थोड़ा सस्ता होगा।

  • चुनौती: शेयर बाजार में गिरावट का असर म्यूचुअल फंड और डायरेक्ट स्टॉक निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दिख सकता है। सीमा शुल्क में छूट की समाप्ति से कुछ आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।


निष्कर्ष (जनहित के नजरिए से)

बजट 2026 को “सतत विकास और अनुशासन” का बजट कहा जा सकता है। सरकार ने लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय देश की ‘क्रेडिट रेटिंग’ और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर ध्यान दिया है। राजकोषीय घाटे को कम करना और पूंजीगत व्यय को बढ़ाना इस बात का संकेत है कि सरकार भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की नींव रख रही है। हालांकि बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया नकारात्मक रही है, लेकिन स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में किए गए प्रावधान लंबे समय में आम जनता के जीवन स्तर को सुधारने में मददगार साबित होंगे।