April 18, 2026

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मुख्यमंत्री धामी ने मातृ संस्कार समागम में मातृशक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया

देहरादून: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर, देहरादून में विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से उपस्थित मातृशक्ति का हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। कार्यक्रम का केंद्रीय विचार ‘मजबूत परिवार, मजबूत राष्ट्र’ था, जिसके अंतर्गत सांस्कृतिक जागरण और संस्कारों के माध्यम से उत्तराखंड को सशक्त बनाने का संदेश प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताया, इस बात पर जोर देते हुए कि आधुनिकता और परंपरा का संतुलन ही वास्तविक विकास का मार्ग है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनका जीवन विशेष सुविधाओं से नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से निर्मित हुआ है। एक साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने प्रारंभ से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व समझा। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना। मुख्यमंत्री ने बल दिया कि उच्च पद या प्रतिष्ठा की बजाय मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं, और यही मूल्य आज भी उनके निर्णयों का आधार हैं।

मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें प्रदेशभर से पधारी माताओं और बहनों के बीच संवाद का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनप्रतिनिधियों, सामाजिक क्षेत्रों की मातृशक्ति, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली नारीशक्ति तथा प्रदेश की बेटियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करेगा। श्री धामी ने विश्वास जताया कि यह समागम समाज और राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति की भूमिका को सशक्त करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

श्री धामी ने भारतीय संस्कृति में माता के सर्वोच्च स्थान को रेखांकित किया। उन्होंने मातृशक्ति को परिवार की धुरी बताते हुए कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और सशक्त परिवार से ही सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने विश्वमांगल्य सभा के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम एवं माता कौशल्या, भगवान श्रीकृष्ण एवं माता यशोदा तथा छत्रपति शिवाजी महाराज एवं माता जीजाबाई के उदाहरण देते हुए कहा कि इनके व्यक्तित्व निर्माण में मातृसंस्कारों की निर्णायक भूमिका रही। माता द्वारा दिए गए संस्कार ही चरित्र, विचार और व्यवहार की नींव रखते हैं, जो नैतिकता, धैर्य और समाज के प्रति उत्तरदायित्व विकसित करते हैं।

मुख्यमंत्री ने पारिवारिक संरचना में आए बदलावों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें संयुक्त परिवारों का स्वरूप सीमित होना और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ना शामिल है। उन्होंने माना कि इससे सामूहिकता और आत्मीयता का भाव प्रभावित हुआ है। आधुनिक जीवनशैली के कारण परिवारों के बीच संवाद में कमी आई है। उन्होंने परिवार की मूल भावना—त्याग, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव—को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा को समय की मांग बताते हुए उन्होंने आधुनिकता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परिवार संस्कारों का प्रथम विद्यालय है, जहाँ बच्चे सम्मान, अनुशासन और राष्ट्रभाव जैसे मूल्य सीखते हैं।

श्री धामी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ऐसे कार्यक्रम सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण को नई दिशा देते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह वैचारिक संवाद मातृशक्ति को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान कर, समाज और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सुदृढ़ करेगा। उन्होंने अंत में कहा कि मातृशक्ति में वह सामर्थ्य है, जिससे वे परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती गीता धामी ने सामाजिक सेवा को मानवीय जीवन का मूल बताया और ‘सेवा परमो धर्मः’ के भाव को जीवन की वास्तविक साधना कहा। उन्होंने माँ को समाज निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि माँ ही बच्चों में सेवा, त्याग और संवेदना के बीज बोती है। श्रीमती धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि सेवा भाव से अगली पीढ़ी को जोड़ने पर असंवेदनशीलता और सामाजिक विघटन कम हो सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रतिस्पर्धा के साथ संवेदना, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ पढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी परिवारों से संवाद को जीवित रखने, सेवा को दिनचर्या का हिस्सा बनाने और बच्चों को समाज के प्रति संवेदनशील बनाने का आग्रह किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘सप्त मातृ शक्ति सम्मान’ के तहत 7 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली श्रीमती ममता राणा, श्रीमती ममता रावत, सुश्री शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, श्रीमती राजरानी अग्रवाल, श्रीमती मन्जू टम्टा और सुश्री कविता मलासी को सम्मानित किया। कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई महिलाएं, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।