नई दिल्ली। उत्तराखंड से सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा सत्र के दौरान ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से पूछा कि जल जीवन मिशन (JJM) के तहत उत्तराखंड को वर्ष 2024-25 का शेष बजट अभी तक जारी क्यों नहीं हुआ है?
अजय भट्ट ने सदन को बताया कि उत्तराखंड एक पर्वतीय और आपदा-प्रभावित राज्य है, जहां कार्य करने के लिए साल में केवल 4–5 महीने ही अनुकूल समय मिलता है। बाकी समय बारिश और बर्फबारी कार्यों में बाधा बनती है। उन्होंने कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद राज्य में जल जीवन मिशन की प्रगति संतोषजनक है, इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस वर्ष का बजट जारी करे।
भट्ट ने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा कई योजनाओं का बजट “अस्वीकार्य” माना गया है, जिसका कारण स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री का जवाब: दो प्रस्ताव भेजे जा चुके, बजट कैबिनेट मंजूरी के बाद जारी होगा
जवाब में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सदन को बताया:
वित्तीय वर्ष 2024–25 में उत्तराखंड के लिए जल जीवन मिशन की शेष राशि जारी करने हेतु राज्य से दो प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
देशभर में अब तक 15 करोड़ घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा चुका है।
लेकिन कई राज्यों में JJM से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायतें मिली हैं, जिन पर गंभीर कार्रवाई चल रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर 119 टीमों द्वारा पूरे देश में जल जीवन मिशन का सर्वे कराया गया। इस सर्वे में:
4000 से अधिक ठेकेदार,
कई सरकारी अधिकारी,
और कुछ मंत्रियों तक पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
मंत्री ने बताया कि सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश भेजे गए हैं।
उत्तराखंड को 90:10 अनुपात में बजट, जल्द जारी होगा
सी.आर. पाटिल ने कहा कि उत्तराखंड को जल जीवन मिशन के तहत 90% केंद्र और 10% राज्य की हिस्सेदारी में धनराशि मिलती है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इस वर्ष का बजट जारी कर दिया जाएगा।
अब तक कितना बजट मिला — कितना शेष है?
मंत्री द्वारा सदन में दी गई जानकारी:
वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक JJM के लिए 2,08,652 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनका लगभग पूरा उपयोग हो चुका है।
उत्तराखंड को अब तक केंद्र से 5,193.75 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
राज्य सरकार ने इसके अनुपात में 1,260.68 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
परियोजना की कुल लागत 9,735.55 करोड़ रुपये है।
इसमें से 309.5 करोड़ रुपये को केंद्र सरकार ने “अस्वीकार्य” माना है।
अभी भी राज्य को 3,568.5 करोड़ रुपये केंद्र से मिलने हैं।
अस्वीकार्य राशि हटाने पर यह शेष राशि 3,289 करोड़ रुपये बैठती है।
इसी राशि के लिए सांसद अजय भट्ट ने सदन में प्रश्न उठाया था।
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