बागेश्वर। जिले के भटखोला में स्थित ताम्र उद्योग केंद्र पारंपरिक तांबे की कला को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार के सहयोग से संचालित यह केंद्र न केवल सदियों पुरानी ताम्र कला को संरक्षित कर रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को रोजगार और बेहतर आय का अवसर भी प्रदान कर रहा है।
परंपरा को दे रहा नई जीवन-दिशा
भटखोला में तांबे के बर्तन, पूजा सामग्री, धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त वस्तुएं और वाद्ययंत्र बनाने की कला पीढ़ियों से चली आ रही है। समय के साथ यह कला कुछ ही परिवारों तक सीमित हो गई थी, लेकिन ताम्र उद्योग केंद्र के सक्रिय प्रयासों से यह परंपरा फिर से जीवित हो रही है।
सरकार का सहयोग—कला के लिए मजबूती
राज्य सरकार इस केंद्र को वित्तीय सहायता, बाजार तक पहुंच और आधुनिक उपकरण प्रदान कर रही है। इन सुविधाओं से कारीगर न केवल अपने कौशल को बेहतर बना रहे हैं, बल्कि आधुनिक मांग के अनुरूप उत्पाद भी तैयार कर पा रहे हैं।
रोजगार, आय और नए अवसर
केंद्र से जुड़े कारीगरों को जहां स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है, वहीं उनके उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने लगे हैं। इससे कलाकारों की आय में वृद्धि हो रही है और पारंपरिक शिल्प को स्थायी आर्थिक आधार मिल रहा है।
भटखोला का ताम्र उद्योग केंद्र आज इस कारीगरी के संरक्षण का मजबूत आधार बन चुका है—जहां परंपरा सिर्फ संरक्षित नहीं हो रही, बल्कि नई चमक के साथ आगे बढ़ रही है।
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