चम्पावत – जनपद चम्पावत के सुनियोजित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर चम्पावत नगर के गौरलचौड़ परिसर से संबंधित गोल्जू देवता भूमि हस्तांतरण का विषय सुलझ गया है। इस निर्णय से नगर नियोजन, आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण और प्रस्तावित गोल्ज्यू कर्रिडोर के विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
चम्पावत नगर के मध्य स्थित यह भूमि लंबे समय से विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण लंबित थी। अब रक्षा विभाग के स्वामित्व वाली 1.543 हेक्टेयर (लगभग 77 नाली 2 मुट्ठी) भूमि के बदले तहसील चम्पावत के ग्राम खर्ककार्की में कुमाऊँ मण्डल विकास निगम लिमिटेड (केएमवीएन) की समान क्षेत्रफल वाली 1.543 हेक्टेयर भूमि के विनिमय को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस भूमि विनिमय को वित्त विभाग स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अनुमोदित किया।
प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी मनीष कुमार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया। समिति ने प्रचलित सर्किल रेट के आधार पर भूमि क्रय एवं विनिमय की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। स्वीकृत वित्तीय विवरण के अनुसार 1.543 हेक्टेयर भूमि की लागत ₹6,55,56,250 निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त केएमवीएन की अवशेष भूमि को भी वर्तमान सर्किल रेट पर क्रय करने की अनुमति दी गई है, जिसकी लागत ₹6,43,45,000 तय की गई है। इस प्रकार कुल स्वीकृत धनराशि ₹12,99,01,250 है।
इस निर्णय का महत्व केवल भूमि हस्तांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चम्पावत नगर के दीर्घकालिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरलचौड़ क्षेत्र नगर के केंद्र में स्थित होने के कारण शहरी नियोजन, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भूमि उपलब्ध होने से गोल्ज्यू कर्रिडोर के विकास की योजना को गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
गोल्जू देवता कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख आराध्य देवता माने जाते हैं और चम्पावत में उनका विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व है। प्रस्तावित कर्रिडोर के विकसित होने से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। इसके साथ ही पार्किंग, पैदल मार्ग, सार्वजनिक स्थल, सौंदर्यीकरण और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि इस भूमि विनिमय से रक्षा विभाग को भी अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार के लिए उपयुक्त भूमि प्राप्त होगी। इससे सामरिक और प्रशासनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित होगी। साथ ही विकास निगम की भूमि का उपयोग स्थानीय विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं के विस्तार में किया जा सकेगा। उन्होंने इसे नगर के संतुलित और योजनाबद्ध विकास की दिशा में एक अहम कदम बताया।
राज्य सरकार की नीति रही है कि उपलब्ध भूमि और संसाधनों का अधिकतम उपयोग जनहित में किया जाए। पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता सीमित होती है, इसलिए समन्वित और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे निर्णय लिए जाना विकास के लिए आवश्यक है। इस भूमि हस्तांतरण से प्रशासनिक समन्वय, सामरिक दृष्टिकोण और स्थानीय विकास—तीनों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है।
स्थानीय स्तर पर इस निर्णय को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। नागरिकों का मानना है कि यदि प्रस्तावित योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ क्रियान्वित किया गया, तो चम्पावत नगर को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित स्वरूप दिया जा सकेगा। विशेष रूप से धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने में गोल्ज्यू कर्रिडोर की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
समग्र रूप से देखा जाए तो गोल्जू देवता भूमि हस्तांतरण को मिली स्वीकृति चम्पावत के विकास इतिहास में एक अहम पड़ाव के रूप में देखी जा सकती है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि नगर के भविष्य के विकास, पर्यटन संवर्धन और आधारभूत संरचना के विस्तार के लिए भी आधार तैयार करता है। आने वाले समय में इस परियोजना की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि यह चम्पावत को नई दिशा और नई गति देने की क्षमता रखती है।
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