अल्मोड़ा-उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में शासन और प्रशासन की पहुंच को सुगम बनाने के लिए ‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ अभियान के तहत ताड़ीखेत और सल्ट विकासखंडों में बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की समस्याओं का एक ही छत के नीचे निस्तारण करना और उन्हें विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना था। न्याय पंचायत बंगोड़ा (ताड़ीखेत) और कुनहील (सल्ट) में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल 1525 लोग लाभान्वित हुए, जबकि प्राप्त हुई 326 शिकायतों में से 185 का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी गई।
ताड़ीखेत और सल्ट में जमीनी स्तर पर समाधान की पहल
पहाड़ी क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अक्सर ग्रामीणों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों या योजनाओं की जानकारी के लिए जिला मुख्यालय या विकासखंड कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस समस्या को समझते हुए प्रशासन ने न्याय पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर ‘सरकार आपके द्वार’ की अवधारणा को चरितार्थ किया है।
विकासखंड ताड़ीखेत की न्याय पंचायत बंगोड़ा में आयोजित शिविर में भारी उत्साह देखा गया। यहाँ स्वास्थ्य, समाज कल्याण, राजस्व और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों के स्टॉल लगाए गए थे। इसी तरह सल्ट के कुनहील में भी अधिकारियों ने सीधे जनता से संवाद किया और उनकी कठिनाइयों को सुना। इन शिविरों में न केवल कागजी कार्रवाई पूरी की गई, बल्कि मौके पर ही प्रमाण पत्र जारी करने और स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं भी प्रदान की गईं।
आंकड़ों में शिविरों की सफलता: बंगोड़ा और कुनहील का विवरण
इन शिविरों की सफलता का अंदाजा वहां पहुंचे लोगों की संख्या और निस्तारित मामलों से लगाया जा सकता है।
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न्याय पंचायत बंगोड़ा (ताड़ीखेत): यहाँ सबसे अधिक सक्रियता देखी गई, जहाँ 1141 लोगों ने अलग-अलग योजनाओं का लाभ उठाया। शिविर के दौरान कुल 256 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए 138 शिकायतों का निस्तारण वहीं कर दिया। बाकी बची शिकायतों के लिए समय सीमा निर्धारित कर संबंधित विभागों को भेज दिया गया है।
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न्याय पंचायत कुनहील (सल्ट): यहाँ आयोजित शिविर में 384 ग्रामीण पहुंचे। प्रशासन को कुल 70 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 47 का निपटारा मौके पर ही कर दिया गया।
संयुक्त रूप से देखें तो दोनों स्थानों पर प्रशासन ने 50 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का तुरंत समाधान कर व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत किया है।
विभिन्न विभागों की सहभागिता और जनसेवा
इन बहुउद्देशीय शिविरों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा निशुल्क जांच और दवा वितरण, राजस्व विभाग द्वारा आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र संबंधी परामर्श, तथा समाज कल्याण विभाग द्वारा पेंशन योजनाओं के फॉर्म भरवाए गए। कृषि और उद्यान विभाग के विशेषज्ञों ने काश्तकारों को नई तकनीक और सब्सिडी वाली योजनाओं की जानकारी दी। शिविरों में अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि कैसे वे घर बैठे या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
आम आदमी पर प्रभाव और आगे की राह
इन शिविरों का सबसे बड़ा प्रभाव उन बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ा है, जो लंबी दूरी तय कर सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाते थे। मौके पर शिकायत दर्ज होने और अधिकारी के सामने बात रखने से पारदर्शिता बढ़ती है। भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होती है क्योंकि जनता और प्रशासन के बीच कोई बिचौलिया नहीं होता।
भविष्य में इस तरह के आयोजनों से शासन की कार्यप्रणाली में सुधार आने की उम्मीद है। जब अधिकारी स्वयं गांवों तक पहुंचेंगे, तो उन्हें क्षेत्र की वास्तविक बुनियादी समस्याओं (जैसे पानी, सड़क और बिजली) का सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे विकास कार्यों की योजना बनाने में भी आसानी होगी।
निष्कर्ष: जनहित में एक सार्थक कदम
‘जन जन की सरकार, जन जन के द्वार’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रहा है। ताड़ीखेत और सल्ट के शिविरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो, तो जनता की आधी समस्याओं का समाधान उनके घर के पास ही संभव है। इससे न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि आम आदमी के मन में राज्य सरकार की योजनाओं के प्रति जागरूकता और जुड़ाव भी पैदा होता है।
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