April 18, 2026

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काफलीगैर में मातम: गुलदार के झपट्टे से 60 फीट नीचे खाई में गिरी प्रेमा देवी, मौके पर ही दम तोड़ा

बागेश्वर, उत्तराखंड। पहाड़ों में गुलदार और इंसानों के बीच का संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया दुखद घटना बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के अंतर्गत काफलीगैर से सामने आई है, जहाँ बिनसर के जंगलों में चारा पत्ती लेने गई एक महिला की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि महिला पर गुलदार ने हमला किया, जिससे घबराकर या असंतुलित होकर वह गहरी खाई में जा गिरी। हालांकि, वन विभाग इस मामले में फूंक-फूंकर कदम रख रहा है और आधिकारिक तौर पर गुलदार के हमले की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है। यह घटना एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कैसे हुआ पूरा हादसा: सिलसिलेवार घटनाक्रम

काफलीगैर के पासदेव गांव की निवासी 45 वर्षीय प्रेमा देवी मंगलवार को अन्य महिलाओं के साथ चारा लेने के लिए बिनसर के जंगलों में गई थीं। प्रेमा देवी के साथ गांव की ही विमला देवी भी मौजूद थीं। दोपहर के समय जब महिलाएं अपने सिर पर बांज (हरा चारा) का भारी गट्टर लेकर वापस घर की ओर लौट रही थीं, तभी अचानक जंगल के बीचों-बीच यह हादसा हुआ।

विमला देवी के अनुसार, प्रेमा देवी उनसे कुछ दूरी पर आगे चल रही थीं। अचानक वहां गुलदार ने झपट्टा मार दिया। इस आकस्मिक हमले से बचने की कोशिश में या झपट्टे के धक्के से प्रेमा देवी का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे 60 फीट गहरी खाई में जा गिरीं। विमला देवी ने तुरंत गांव में शोर मचाया और ग्रामीणों को घटना की सूचना दी। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुँचते और खाई से प्रेमा देवी को बाहर निकालते, उनकी मौत हो चुकी थी।

वन विभाग का रुख और कानूनी प्रक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। थानाध्यक्ष मनवर सिंह ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शी विमला देवी के बयानों को दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, इस मामले में वन विभाग का रुख थोड़ा अलग है। डीएफओ प्रदीप कुमार धौलाखंड़ी के मुताबिक, विभाग की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया है, लेकिन गुलदार के हमले की पुष्टि केवल फॉरेंसिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही की जाएगी।

फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा रोष है कि वन विभाग वन्यजीवों के हमले की बात को आसानी से स्वीकार नहीं कर रहा है, जबकि प्रत्यक्षदर्शी साफ तौर पर गुलदार के होने की बात कह रहे हैं।

प्रभावित परिवार और ग्रामीणों की मांग

प्रेमा देवी के आकस्मिक निधन से पूरे पासदेव गांव में शोक की लहर है। उनके परिवार की स्थिति काफी नाजुक है; उनके पति प्रेम राम मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। प्रेमा देवी अपने पीछे तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने और क्षेत्र में सक्रिय गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की पुरजोर मांग की है।

आम जनजीवन पर असर और सुरक्षा चुनौतियां

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बांज और चारे के लिए महिलाओं का जंगल जाना एक दैनिक आवश्यकता है। ऐसे में जंगलों में गुलदार की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। इस घटना के बाद आसपास के गांवों में भी डर का माहौल है। लोग अब अकेले जंगल जाने से कतरा रहे हैं।

गुलदार की बढ़ती सक्रियता के कारण बच्चों की सुरक्षा और मवेशियों के चराने की समस्या भी गहरा गई है। अक्सर देखा गया है कि रिहायशी इलाकों के करीब जंगली जानवरों के आने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता का प्रशासन पर से विश्वास कम हो रहा है।

निष्कर्ष: समाधान की दिशा में कदम

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों में रहने वाले लोगों की मूलभूत सुरक्षा की समस्या को दर्शाती है। वन विभाग को केवल रिपोर्ट का इंतज़ार करने के बजाय, प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ानी चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। साथ ही, पीड़ित परिवार को बिना किसी देरी के सहायता राशि प्रदान की जानी चाहिए। जनता को भी जागरूक रहने और समूह में जंगल जाने की सलाह दी जा रही है, ताकि ऐसी अनहोनी को टाला जा सके।