हल्द्वानी। विकास कार्यों की कछुआ चाल और कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही उत्तराखंड की सड़कों पर मासूम जिंदगियों के लिए काल साबित हो रही है। ताजा मामला हल्द्वानी के पंचक्की-दमुआढुंगा मार्ग का है, जहाँ सड़क किनारे खोदे गए एक गहरे गड्ढे के कारण रास्ता संकरा हो गया और इसी संकरी सड़क ने एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक की जान ले ली। रविवार दोपहर हुए इस हादसे में स्कूटी सवार बुजुर्ग को एक कैंटर (डंपर) ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर शहर में चल रहे सीवर और पाइपलाइन कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ हादसा: अंतिम संस्कार से लौट रहे थे सुरेश चंद्र
मृतक की पहचान सुरेश चंद्र पांडेय (69 वर्ष) के रूप में हुई है। वह पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग में कृषि वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत थे और साल 2016 में सेवानिवृत्त हुए थे। वर्तमान में वह अपनी पत्नी लता के साथ दमुआढुंगा के शांतिनगर (भोटियापड़ाव) क्षेत्र में रह रहे थे।
रविवार को सुरेश चंद्र अपने भाई के साथ रानीबाग में एक परिचित के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। वापसी के दौरान दोनों भाई अलग-अलग वाहनों से लौट रहे थे। सुरेश चंद्र अपनी स्कूटी (UK04 L 3908) से घर की ओर आ रहे थे। दोपहर करीब 12:30 बजे जैसे ही वह पंचक्की-दोनहरिया मार्ग पर अंबिका विहार कॉलोनी के गेट के पास पहुंचे, वहां पहले से खुदे हुए एक बड़े गड्ढे की वजह से सड़क बेहद संकरी हो चुकी थी। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक कैंटर (UP26 AT 2310) ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूटी कैंटर के अगले पहिये में फंस गई और सुरेश चंद्र का सिर पिछले पहिये के नीचे आ गया, जिससे उनकी तत्काल मृत्यु हो गई।
दो महीने से खुदा पड़ा था मौत का गड्ढा
हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट एजेंसी (UUSDA) की कार्यप्रणाली है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सीवर लाइन डालने के लिए एजेंसी ने करीब दो महीने पहले यहां गहरा गड्ढा खोदा था। पेयजल लाइन बीच में आने के कारण लाइन शिफ्टिंग का काम अटक गया और गड्ढे को उसी स्थिति में छोड़ दिया गया।
लंबे समय से इस गड्ढे की वजह से यहां यातायात बाधित हो रहा था और सड़क की चौड़ाई आधी से भी कम रह गई थी। स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत की थी, लेकिन निर्माण इकाई ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की। न तो वहां उचित बैरिकेडिंग थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिसके चलते यह व्यस्त मार्ग एक ‘डेथ ट्रैप’ में तब्दील हो गया।
परिजनों का बुरा हाल, पुलिस और विभाग के प्रति आक्रोश
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया। सूचना मिलते ही काठगोदाम और हल्द्वानी कोतवाली की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों ने मौके पर जमकर हंगामा किया और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को बुलाने की मांग की। लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि एक छोटे से काम के लिए महीनों तक सड़क को खोदकर छोड़ देना कहाँ तक उचित है।
सुरेश चंद्र पांडेय के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटियां हैं। एक बेटी बेंगलुरु और दूसरी नोएडा में रहती है। दोनों बेटियों के हल्द्वानी पहुंचने के बाद सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने एसपी सिटी और सीओ सिटी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि इस लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है।
आम जनमानस पर प्रभाव और सुरक्षा की कमी
हल्द्वानी के विभिन्न इलाकों में इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर सड़कें खोदी जा रही हैं। चाहे वह सीवर लाइन हो या गैस पाइपलाइन, काम पूरा होने के बाद सड़कों की मरम्मत समय पर नहीं की जाती। पंचक्की मार्ग जैसे व्यस्त इलाकों में जहां भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां सड़क का संकरा होना सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को न्योता देना है। इस हादसे ने शहर के उन तमाम रास्तों पर चलने वाले राहगीरों के मन में डर पैदा कर दिया है जहां निर्माण कार्य अधर में लटके हैं।
निष्कर्ष और जवाबदेही की जरूरत
एक सेवानिवृत्त वैज्ञानिक, जिन्होंने जीवन भर कृषि क्षेत्र में योगदान दिया, उनकी ऐसी दुखद मृत्यु समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ा सबक होनी चाहिए। विभाग का यह तर्क देना कि “लाइन शिफ्टिंग के कारण काम रुका था” किसी की जान की कीमत से बड़ा नहीं हो सकता। यदि समय रहते गड्ढे को भरा जाता या यातायात के लिए वैकल्पिक सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता। प्रशासन को अब केवल जांच तक सीमित न रहकर, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और का ‘सुरेश’ विकास की इस लापरवाही की भेंट न चढ़े।
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