April 18, 2026

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मेहनत की उड़ान: चम्पावत की दिया ने दो कांस्य पदक जीतकर बढ़ाया जिले का मान

चम्पावत – जनपद चम्पावत की होनहार बेटी कु. दिया ने खेल जगत में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम रोशन किया है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के अंतर्गत आयोजित अंतर महाविद्यालय महिला एथलेटिक्स प्रतियोगिता में डिग्री कॉलेज लोहाघाट की बी.ए. की छात्रा कु. दिया ने 10,000 मीटर और 5,000 मीटर दौड़ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दो कांस्य पदक अपने नाम किए।

कु. दिया की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर आज जिला सभागार चम्पावत में एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें जनपद प्रशासन द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह जनपद की बेटियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

सम्मान समारोह के दौरान वरिष्ठ कोषाधिकारी  सीमा बंगवाल एवं लोक निर्माण विभाग की सहायक अभियंता प्रियंका चौहान ने कु. दिया को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का माहौल उत्साह और गर्व से भरा रहा, जहां उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने तालियों के साथ इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने कु. दिया के पिता  महेश राम को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और बेटी की इस सफलता के लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं दीं। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि “कु. दिया की यह उपलब्धि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास का परिणाम है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि दिया की यह सफलता जिले की अन्य छात्राओं को खेलों की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही आशा व्यक्त की कि कु. दिया भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भी शानदार प्रदर्शन कर चम्पावत और उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगी।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और गणमान्य नागरिकों ने भी कु. दिया को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां जिले की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होती हैं।

कु. दिया की यह सफलता यह संदेश देती है कि यदि लगन, मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय पहचान बना सकती हैं। चम्पावत को आज अपनी इस बेटी पर गर्व है, जिसने मेहनत के दम पर सफलता की नई कहानी लिखी है।