चंपावत

चंपावत: सेवा संकल्प फाउंडेशन के सावन उत्सव में 10 कर्मठ महिलाओं को मिला 'नंदा शिखर सम्मान', महिला सशक्तिकरण पर जोर

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 11 अगस्त 2026 | 07:43 PM22

चंपावत: सेवा संकल्प फाउंडेशन के सावन उत्सव में 10 कर्मठ महिलाओं को मिला 'नंदा शिखर सम्मान', महिला सशक्तिकरण पर जोर

चंपावत, 11 अगस्त 2026:

सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा टनकपुर के मिलन वाटिका में ‘सावन उत्सव – 2026’ का आयोजन किया गया, जिसमें मातृशक्ति का सम्मान और देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने पर जोर दिया गया। इस भव्य उत्सव में 10 कर्मठ महिलाओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘नंदा शिखर सम्मान’ से नवाजा गया।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान, सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ‘एक पौधा, प्रकृति के नाम’ मुहिम के तहत चंदन का पौधा रोपा। उन्होंने उपस्थित सभी महिलाओं को पौधा वितरण कर पर्यावरण संरक्षण एवं पौधरोपण का संकल्प दिलाया।

महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर

श्रीमती गीता धामी ने कार्यक्रम में मौजूद माताओं एवं बहनों से अपनी लोक-संस्कृति को सहेजने तथा पारंपरिक परिधानों व सोलह श्रृंगार में सज-धजकर उत्सव की भव्यता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, \”हमारी मातृशक्ति केवल घर-चौखट संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे हमारे खेत, संस्कृति और आजीविका की मुख्य धुरी हैं।\” उन्होंने शिक्षा, खेल, प्रशासन और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में महिलाओं के अदम्य साहस और प्रतिभा की सराहना की।

उन्होंने बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही और ‘नंदा गौरा योजना’ का उल्लेख किया, जो बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक उनका सहयोग करती है। श्रीमती धामी ने कहा कि असली सशक्तिकरण तब आता है जब महिलाएँ आत्मनिर्भर बनती हैं और अपनी पहचान स्वयं गढ़ती हैं। ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ और ‘लखपति दीदी’ जैसी पहलों से महिलाएँ सफल उद्यमी बन रही हैं। उत्तराखंड की पारंपरिक कलाओं, हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य उत्पादों, कृषि, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई और होमस्टे के माध्यम से महिलाएँ न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी के रूप में उन्होंने बहनों और बेटियों से वादा किया कि फाउंडेशन शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और मार्केटिंग के माध्यम से मातृशक्ति को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘नंदा शिखर सम्मान’ से सम्मानित हुईं कर्मठ महिलाएँ

उत्सव के दौरान, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, शिक्षिकाओं, आँगनबाड़ी कार्यकर्तियों, आशा कार्यकर्तियों, आपातकालीन सेवा में चिकित्सा टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत महिलाओं तथा क्षेत्र की प्रथम टुकटुक संचालिका सहित 10 कर्मठ बहनों को ‘नंदा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। श्रीमती गीता धामी ने इन महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनकी साधना और संघर्ष का प्रतीक है, जो समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण की सबसे मजबूत नींव है।

सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियाँ

उत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। ‘सुपर ईंजा डांस प्रतियोगिता’ और ‘मिसेज़ सावन क्वीन – 2026’ प्रतियोगिता कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, मंच पर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित नृत्य प्रस्तुतियाँ, ग्रुप डांस और नाट्य मंचन भी हुए। उत्तराखंड की लोक-परंपराओं को दर्शाती सांतूं-आंठू (गौरा महेश) और झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुतियों ने जनसमूह को भावविभोर कर दिया। ‘सावन सरप्राइज अवॉर्ड्स’ और मजेदार खेलों ने कार्यक्रम में मनोरंजन का तड़का लगाया।

कार्यक्रम का संचालन कल्पना आर्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्य दर्जा मंत्री श्रीमती हेमा जोशी, श्रीमती किरन देवी, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती अंचला बोहरा, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा श्रीमती दीपा जोशी, अध्यक्ष नगर पंचायत बनबसा श्रीमती रेखा देवी, उपाध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती पुष्पा विश्वकर्मा, श्रीमती सुनीता मुरारी मण्डल अध्यक्ष तुलसी कुंवर जी, जिला पंचायत सदस्य बनबसा श्रीमती सरोज चन्द, श्रीमती सुनीता यादव, श्रीमती कपि धस्माना, श्रीमती रुकमणी उनियाल, श्रीमती बबीता गोस्वामी, श्रीमती मुन्नी देवी, सफाई आयोग, श्रीमती गीता देवी, श्रीमती हंसा जोशी, श्रीमती विद्या, श्रीमती निशा वर्मा, श्रीमती रीता कलखुड़िया, श्रीमती उर्मिला चन्द सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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