देहरादून-नए साल की शुरुआत उपभोक्ताओं के लिए राहत की बजाय महंगाई का नया झटका लेकर आई है। बिजली उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में ज्यादा बिल चुकाना पड़ेगा। उत्तराखंड सहित कई राज्यों में बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। बिजली दरों में यह इजाफा फ्यूल सरचार्ज, ट्रांसमिशन लागत और अन्य प्रशासनिक खर्चों के कारण हुआ है।
ऊर्जा निगम की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जनवरी महीने से बिजली की दरों में फ्यूल सरचार्ज जोड़ा गया है। इसके तहत प्रति यूनिट बिजली पर अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। बताया गया है कि औसतन उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट करीब 28 पैसे तक अधिक भुगतान करना होगा। यह राशि भले ही प्रति यूनिट कम प्रतीत होती हो, लेकिन कुल मासिक खपत के हिसाब से देखें तो उपभोक्ताओं के बिजली बिल में साफ तौर पर बढ़ोतरी नजर आएगी।
पिछले साल तीन बार सस्ती, अब चौथी बार महंगी
पिछले वर्ष बिजली दरों में तीन बार कटौती की गई थी, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिली थी। हालांकि, नए साल की शुरुआत में चौथी बार बिजली महंगी कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अस्थायी नहीं बल्कि आने वाले महीनों में भी बनी रह सकती है, क्योंकि ऊर्जा उत्पादन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कोयले और अन्य ईंधनों की कीमतों में वृद्धि, ट्रांसमिशन नेटवर्क के रखरखाव और नए प्रोजेक्ट्स की लागत का बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। इसी वजह से फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) के तहत यह अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया है।
कौन-कौन से उपभोक्ता होंगे प्रभावित
इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान, छोटे उद्योग, कृषि उपभोक्ता और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन भी इससे प्रभावित होंगे। जानकारी के मुताबिक, घरेलू उपभोक्ताओं को 10 पैसे से लेकर 43 पैसे प्रति यूनिट तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है, जबकि कुछ विशेष श्रेणियों में यह बोझ और अधिक हो सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी प्रति यूनिट दर में बढ़ोतरी की गई है। इससे भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन की लागत भी बढ़ सकती है, जो पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की नीति पर अप्रत्यक्ष असर डाल सकती है।
उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
महंगाई पहले से ही आम लोगों की जेब पर असर डाल रही है। ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ना तय है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है। बिजली बिल हर महीने का जरूरी खर्च है, जिसे टालना संभव नहीं होता।
उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी से पहले सरकार और ऊर्जा निगम को वैकल्पिक समाधान तलाशने चाहिए थे। उनका मानना है कि प्रशासनिक खर्चों में कटौती और ऊर्जा उत्पादन के सस्ते स्रोतों को बढ़ावा देकर उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती थी।
ऊर्जा निगम का पक्ष
ऊर्जा निगम का कहना है कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अगर लागत के अनुरूप दरें समायोजित नहीं की जातीं, तो बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता था। निगम का दावा है कि उपभोक्ताओं पर न्यूनतम बोझ डालने की कोशिश की गई है और भविष्य में हालात बेहतर होने पर दरों की समीक्षा की जाएगी।
आगे क्या हो सकता है
आने वाले महीनों में बिजली की खपत बढ़ने की संभावना है, खासकर गर्मी के मौसम में। ऐसे में यदि दरों में और इजाफा हुआ, तो उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ताओं को ऊर्जा बचत पर ध्यान देना चाहिए, जैसे एलईडी बल्ब का इस्तेमाल, अनावश्यक उपकरण बंद रखना और सोलर ऊर्जा जैसे विकल्पों की ओर बढ़ना।
कुल मिलाकर, नए साल की शुरुआत में बिजली महंगी होना उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका है। अब यह देखना होगा कि सरकार और ऊर्जा विभाग आगे चलकर इस बढ़ते बोझ को कम करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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