बागेश्वर/नैनीताल-उत्तराखंड में अवैध खड़िया खनन से उत्पन्न गंभीर समस्याओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं और संबंधित मामलों की सुनवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जारी है। नैनीताल स्थित हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले की कंडा तहसील सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में अवैध खड़िया खनन से आई दरारों के मामलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए अगली तारीख 6 जनवरी निर्धारित की है।
न्यायालय में इस प्रकरण से जुड़ी जनहित याचिका के साथ-साथ खनन इकाइयों से संबंधित 165 मामलों पर भी एक साथ विचार किया जा रहा है। इन मामलों में खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में आई दरारों, भू-धंसाव और ग्रामीणों के मकानों, कृषि भूमि तथा बुनियादी सुविधाओं को हुए नुकसान को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
कोर्ट की पूर्व टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पहले भी यह स्पष्ट किया था कि उत्तराखंड में खनन कार्यों से जुड़े वाहनों पर जीपीएस सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाना चाहिए। अदालत का कहना है कि जीपीएस सिस्टम को राज्य के खनन पोर्टल से जोड़ा जाना जरूरी है, ताकि खनन में लगे वाहनों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके और यह सुनिश्चित हो सके कि खनन नियमों का उल्लंघन न हो।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि खनन कार्य पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और इससे संबंधित सभी आंकड़े खनन पोर्टल पर उपलब्ध होने चाहिए। अदालत का मानना है कि तकनीकी निगरानी से अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों की शिकायतें
मामले के अनुसार, कंडा तहसील सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने अदालत में पत्र और याचिकाएं दाखिल कर बताया है कि अवैध खड़िया खनन के कारण उनके गांवों में जमीन में दरारें आ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर घरों की दीवारें टूटने लगी हैं, पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और खेतों में भी दरारें पड़ गई हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग अवैध खनन से आर्थिक रूप से संपन्न हो गए हैं, जबकि आम ग्रामीणों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई परिवारों को अपने घर छोड़ने तक की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
खनन इकाइयों से जुड़े मामले
इस प्रकरण में खनन से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के खिलाफ दायर मामलों पर भी सुनवाई चल रही है। अदालत ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। राज्य सरकार की ओर से भी अदालत को अवगत कराया गया है कि खनन नियमों के पालन को लेकर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि अवैध खनन के मामलों पर कार्रवाई की जा रही है और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे क्षेत्रीय स्तर पर सख्ती बरतें।
पर्यावरण और सुरक्षा का मुद्दा
अवैध खड़िया खनन को लेकर पर्यावरणीय संतुलन और जन-सुरक्षा का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैज्ञानिक अध्ययन के खनन किए जाने से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, भू-धंसाव और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
न्यायालय ने भी इस बात पर जोर दिया है कि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अगली सुनवाई पर नजर
हाईकोर्ट ने सभी मामलों में अगली संयुक्त सुनवाई की तिथि 6 जनवरी तय की है। इस दौरान अदालत द्वारा राज्य सरकार, संबंधित विभागों और अन्य पक्षकारों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा सकती है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए जा सकते हैं।
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