चम्पावत: ‘चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव 2026’ के चौथे दिन टनकपुर में एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस भव्य संध्या में लोक परंपराएं, वीर गाथाएं, क्षेत्रीय संगीत और सूफियाना संगीत प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति देर रात तक चली, जिसमें उपस्थित दर्शकों ने सहभागिता की।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों की संख्या में दर्शक उपस्थित थे। कार्यक्रम स्थल पर रोशनी की व्यवस्था की गई थी, जिससे पंडाल प्रकाशित रहा। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम का आरंभ उत्तराखंड की वीर परंपरा पर आधारित प्रस्तुति के साथ हुआ। माधो सिंह भंडारी के जीवन पर केंद्रित एक ऊर्जावान प्रदर्शन किया गया। इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम के वातावरण में वीर रस का संचार किया। गढ़वाल क्षेत्र से संबंधित माधो सिंह भंडारी की वीरता, साहस और त्याग की गाथा टनकपुर में प्रस्तुत की गई, जिसने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान ‘टनकपुर में गूंजा वीर माधो सिंह’ जैसे नारों का उद्घोष किया गया, और उपस्थित दर्शकों ने तालियों से इसका समर्थन किया। यह प्रस्तुति कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक एकता का संदेश देती प्रतीत हुई।
इसके बाद लोकगायक मनोज आर्या ने कुमाऊंनी लोकसंगीत प्रस्तुत किया। उनके गीतों ने कार्यक्रम स्थल पर उत्सव जैसा माहौल स्थापित किया। उन्होंने “ढाई हाथे धमेली” और “चहा को होटल” जैसे गीतों का गायन किया, जिस पर युवा और बुजुर्ग दोनों वर्ग के दर्शकों ने आनंद लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की इस श्रृंखला में, गायिका राधा श्रीवास्तव ने भोजपुरी संगीत पेश किया। उन्होंने अपने चर्चित गीत “चटनिया ये सइया सिलवट पर पीसी” का प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने ध्यानपूर्वक सुना। भोजपुरी लोकधुनों ने कार्यक्रम के वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार किया। दर्शकों ने तालियां बजाकर और उत्साह से उनकी प्रस्तुति का स्वागत किया तथा उसका आनंद लिया।
इस कार्यक्रम में भारतीय सूफी संगीत की गायिका ज्योति नूरन ने भी प्रस्तुति दी। उनकी सशक्त आवाज़ में टनकपुर की संध्या में आध्यात्मिक प्रभाव देखा गया। उन्होंने “पटाखा गुड्डी”, “महादेव”, “अलबेला सजन आयो” और “पाँव की जुत्ती” जैसे गीतों का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों से पूरा पंडाल संगीत से प्रभावित रहा। दर्शकों ने देर रात तक सूफियाना संगीत का अनुभव किया और उनकी प्रस्तुति को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
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