चम्पावत: टनकपुर स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के समीप स्थित विशाल मैदान में आयोजित सात दिवसीय चम्पावत सरस कॉर्बेट महोत्सव – 2026 की पहली सांस्कृतिक संध्या अत्यंत सफल रही। यह संध्या लोक-संगीत की मधुर धुनों और सांस्कृतिक उत्साह से परिपूर्ण थी, जिसने हजारों दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनपद की समृद्ध लोक संस्कृति, साहसिक पर्यटन, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय प्रतिभाओं को एक व्यापक मंच प्रदान करना है।
रंग-बिरंगी आकर्षक रोशनी से सजे महोत्सव स्थल पर हजारों दर्शकों की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन की शुरुआत को विशेष बना दिया। इस विशाल जनसमूह का उत्साह देखने लायक था, जिसने महोत्सव के प्रति स्थानीय लोगों और आगंतुकों के गहरे रुझान को दर्शाया।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ चम्पावत के गौरवशाली इतिहास पर आधारित एक प्रभावशाली लेज़र शो के साथ हुआ। इस आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और जनपद की ऐतिहासिक यात्रा का एक दृश्य अनुभव प्रदान किया। लेज़र शो में भगवान विष्णु के कुर्म अवतार से लेकर आधुनिक चम्पावत की विकास यात्रा तक के विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों को प्रकाश और ध्वनि के समन्वय के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इस अद्भुत दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति में चम्पावत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक मंदिरों, लोक परंपराओं और महत्व को जीवंत रूप में दर्शाया गया। लेज़र शो ने न केवल उपस्थित जनसमूह का भरपूर मनोरंजन किया, बल्कि उन्हें अपने जनपद की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर गर्व का अनुभव भी कराया।
लेज़र शो के समापन के पश्चात आयोजित स्टार नाइट में कुमाऊँनी लोकसंगीत की मधुर धुनें गूँजीं, जिन्होंने पूरे वातावरण में नई ऊर्जा का संचार किया। इस स्टार नाइट में प्रसिद्ध लोक कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से समां बांध दिया।
लोकगायक जितेंद्र तोमक्याल ने अपने लोकप्रिय गीत “लाली हो लाली”, “ओ भीना कस के जानू द्वारहाटा” और “हाथ पैरेली घड़ी” की प्रस्तुति देकर युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी उपस्थित श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। उनकी सुरीली आवाज और मंच पर ऊर्जावान उपस्थिति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया और उन्हें देर तक अपनी धुन पर थिरकने के लिए प्रेरित किया।
जनपद की उभरती लोकगायिका सीमा विश्वकर्मा ने भी अपने गीतों से कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा का संचार किया। स्थानीय प्रतिभाओं को ऐसे बड़े मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलना दर्शकों के लिए भी विशेष रूप से उत्साहवर्धक रहा। यह महोत्सव स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
इसके बाद, प्रसिद्ध लोकगायिका माया उपाध्याय ने मंच संभाला। उन्होंने “नैनीताल की माधुली”, “हाई ककड़ी” और “कान में डबल झुमका” जैसे अपने सुपरहिट गीतों की एक के बाद एक प्रस्तुति दी, जिससे पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और संगीत की धुन पर थिरकने लगा। युवाओं के कदम देर रात तक इन लोकधुनों पर थिरकते रहे, और पूरा वातावरण एक उत्सवमय ऊर्जा से सराबोर रहा।
यह सात दिवसीय महोत्सव 18 फरवरी से 24 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है। महोत्सव जनपद की अनूठी लोक संस्कृति, रोमांचक साहसिक पर्यटन अवसरों, पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों, स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों और छिपी हुई स्थानीय प्रतिभाओं को एक व्यापक मंच प्रदान कर रहा है। इसका उद्देश्य इन सभी पहलुओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
19 फरवरी की स्टार नाइट में हिमनाद बैंड, खुशी और गोविंद दिगारी जैसे कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे और दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। महोत्सव के शेष दिनों में भी विभिन्न सांस्कृतिक और मनोरंजक कार्यक्रम जारी रहेंगे।
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