चंपावत वन प्रभाग को मिला स्थायी डीएफओ, ढिनो पुरुषोत्तमन ने संभाला कार्यभार
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 11 अगस्त 2026 | 08:59 PM2

चंपावत, 11 अगस्त 2026 को चंपावत वन प्रभाग को एक स्थायी प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मिल गया है। भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2024 बैच के अधिकारी ढिनो पुरुषोत्तमन ने मंगलवार को प्रभाग के 19वें डीएफओ के रूप में अपना कार्यभार ग्रहण किया। यह डीएफओ के रूप में उनकी पहली तैनाती है, जिससे वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
नवनियुक्त डीएफओ ने जिलाधिकारी से की मुलाकात
कार्यभार संभालने के बाद, नवनियुक्त डीएफओ ढिनो पुरुषोत्तमन ने जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार से शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने जिलाधिकारी को पुष्प गुच्छ भेंट किया। इस अवसर पर, जिलाधिकारी ने श्री पुरुषोत्तमन को उनके नए दायित्वों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जिले में वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विकास कार्यों में भी प्रभावी अंतर्विभागीय समन्वय के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की।
स्थायी नेतृत्व की बहाली
चंपावत वन प्रभाग को लगभग एक वर्ष के अंतराल के बाद एक स्थायी डीएफओ प्राप्त हुआ है। इससे पूर्व, पिथौरागढ़ वन प्रभाग के डीएफओ आशुतोष सिंह लगभग एक वर्ष से चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे। उनके स्थानांतरण के उपरांत, ढिनो पुरुषोत्तमन की स्थायी नियुक्ति से अब प्रभाग को नियमित नेतृत्व मिलेगा।
वन विभाग के अधिकारियों ने किया स्वागत
कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत, वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने नवनियुक्त डीएफओ ढिनो पुरुषोत्तमन का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। यह स्वागत इस बात का प्रतीक है कि विभाग को स्थायी नेतृत्व से महत्वपूर्ण अपेक्षाएं हैं।
डीएफओ की पृष्ठभूमि और प्राथमिकताएं
मूल रूप से केरल के रहने वाले युवा आईएफएस अधिकारी ढिनो पुरुषोत्तमन ने चंपावत की समृद्ध प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और खूबसूरत वन क्षेत्रों को क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता वन और पर्यावरण संरक्षण होगी। इसके साथ ही, वन्यजीव सुरक्षा, वनों के संरक्षण एवं संवर्धन, तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित रूप से कार्य किया जाएगा।
वन संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
नए डीएफओ की स्थायी तैनाती से चंपावत वन प्रभाग को नियमित और स्थायी नेतृत्व मिलने की उम्मीद है। इससे वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, और विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को नई गति मिलने की संभावना है। एक स्थायी नेतृत्व के तहत, इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी और निरंतर कार्य संभव होगा, जो क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
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