April 18, 2026

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चंपावत में ‘सुरक्षित बचपन, नशा मुक्त’ अभियान, स्कूलों में स्वास्थ्य जांच और नशा मुक्ति केंद्रों का निरीक्षण

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चंपावत: शासन के स्पष्ट निर्देशों और जिलाधिकारी  मनीष कुमार के मार्गदर्शन में जनपद चंपावत में एक व्यापक और बहुआयामी अभियान का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य जनपद के युवाओं को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से सुरक्षित रखना है, जिसके अंतर्गत उनके स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। यह पहल ‘सुरक्षित बचपन, नशा मुक्त चंपावत’ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो युवा पीढ़ी के भविष्य को संवारने पर केंद्रित है।

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने अभियान की प्रगति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष निरीक्षण दल का गठन किया गया है, जिसने जनपद के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। यह दल छात्रों के स्वास्थ्य की स्थिति का आकलन करने और उन्हें नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

इसी क्रम में, अभियान के तहत राजकीय इंटर कॉलेज दिगालीचौड़ और राजकीय इंटर कॉलेज रौसाल में विशेष गतिविधियां आयोजित की गईं। इन विद्यालयों में कुल 100 छात्र-छात्राओं की प्रारंभिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जिसमें उनके सामान्य स्वास्थ्य मानकों की जांच की गई। यह स्क्रीनिंग प्रक्रिया छात्रों की समग्र भलाई सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित स्वास्थ्य संबंधी चिंता का प्रारंभिक स्तर पर पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई थी।

प्रारंभिक स्क्रीनिंग के दौरान, कुछ विशिष्ट मानदंडों और संदेह के आधार पर 10 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया, जिनके लिए विस्तृत चिकित्सा परीक्षण कराए गए। इन गहन परीक्षणों का उद्देश्य किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम या नशे की प्रवृत्ति का सटीक रूप से निर्धारण करना था। प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसके परिणाम का उत्सुकता से इंतजार किया जा रहा था।

विस्तृत चिकित्सा परीक्षणों की रिपोर्ट जारी होने पर, सभी संबंधित पक्षों को बड़ी राहत मिली। रिपोर्ट में सभी 10 छात्र-छात्राओं के परिणाम नकारात्मक पाए गए, जिसका अर्थ है कि उनमें नशे से संबंधित कोई भी प्रवृत्ति या स्वास्थ्य समस्या नहीं पाई गई। यह सकारात्मक परिणाम अभियान की सफलता और छात्रों के स्वस्थ जीवन के प्रति आश्वस्त करता है, साथ ही माता-पिता और अभिभावकों के लिए भी संतोष का विषय है।

शैक्षणिक संस्थानों में सघन स्वास्थ्य जांच और जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ, जिला प्रशासन ने जनपद में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों की गतिविधियों पर भी अपनी निगरानी बढ़ा दी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ये केंद्र निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करें और प्रभावी उपचार प्रदान करें, प्रशासन द्वारा इन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है। यह दोतरफा रणनीति जनपद को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।

जिलाधिकारी द्वारा विशेष रूप से गठित निरीक्षण दल ने जनपद के तीनों प्रमुख नशा मुक्ति केंद्रों का गहन निरीक्षण किया। इन केंद्रों में देव भूमि नशा मुक्ति केंद्र चम्पावत, युवा कल्याण नशा मुक्ति केंद्र बनबसा और जागृति देव भूमि नशा मुक्ति केंद्र टनकपुर शामिल थे। दल ने इन सभी केंद्रों की कार्यप्रणाली, उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया।

निरीक्षण के दौरान, टीम ने प्रत्येक केंद्र में अपनाई जा रही उपचार प्रणाली, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केंद्र सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित सभी दिशानिर्देशों और गुणवत्ता मानदंडों का पालन कर रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्रों की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जांच आवश्यक थी।

इस गहन जांच प्रक्रिया के फलस्वरूप, कुछ नशा मुक्ति केंद्रों में विशिष्ट कमियाँ और खामियाँ पाई गईं। जिला प्रशासन ने इन अनियमितताओं को अत्यंत गंभीरता से लिया है। इन कमियों को चिन्हित करने के पश्चात, केंद्र संचालकों को तत्काल प्रभाव से निर्देश जारी किए गए हैं कि वे इन सभी चिह्नित खामियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर दुरुस्त करें और अपनी सेवाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप लाएँ।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी केंद्र द्वारा निर्धारित मानकों की अनदेखी या उल्लंघन पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध कठोर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन का यह कदम नशा मुक्ति केंद्रों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और उपचार की गुणवत्ता बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जिला प्रशासन का सर्वोपरि लक्ष्य जनपद चंपावत को पूर्णतः नशा मुक्त बनाना है। इस अभियान के माध्यम से, प्रशासन का उद्देश्य युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बनाना है, ताकि वे एक स्वस्थ और उत्पादक जीवन जी सकें। यह सामूहिक प्रयास एक स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है।