चंपावत

कैलाश मानसरोवर यात्रा के अंतिम दल से गीता धामी ने की मुलाकात, दीं शुभकामनाएं

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 10 अगस्त 2026 | 05:17 PM8

कैलाश मानसरोवर यात्रा के अंतिम दल से गीता धामी ने की मुलाकात, दीं शुभकामनाएं

चंपावत, कैलाश मानसरोवर यात्रा का अंतिम दल उत्तराखंड के टनकपुर से अपनी आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करने से पूर्व स्थानीय प्रतिनिधि गीता धामी से मिला। कुमाऊं मंडल विकास निगम के शारदा टूरिस्ट रेस्ट हाउस में आयोजित इस मुलाकात के दौरान, विभिन्न राज्यों से आए 44 सदस्यीय यात्रा दल ने गीता धामी के साथ अपने अनुभवों को साझा किया।

यात्रा की तैयारियों पर चर्चा

गीता धामी ने यात्रा दल के सदस्यों से उनकी यात्रा की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यात्रियों के स्वास्थ्य, खान-पान और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में पूछताछ की। इस दौरान, यात्रियों ने अपनी यात्रा के दौरान अब तक के अनुभवों को भी साझा किया, जिसमें उन्होंने यात्रा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

इस अवसर पर गीता धामी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा आस्था, आध्यात्मिक चेतना और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर यात्रा के पड़ाव के दौरान यात्रियों का स्वागत और सेवा-सत्कार करना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने यात्रा दल के सभी सदस्यों को मंगलमय और सुखद यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।

यात्रा का अगला पड़ाव

यह यात्रा दल कल प्रातः टनकपुर से आगे की यात्रा के लिए प्रस्थान करेगा। प्रतिनिधियों ने यात्रियों की सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए महादेव से प्रार्थना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी यात्री सुखद अनुभवों के साथ अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।

यात्रा का महत्व

कैलाश मानसरोवर, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित एक पवित्र पर्वत है, जिसे हिंदू, बौद्ध, जैन और तिब्बती धर्मों में महत्वपूर्ण माना जाता है। हिंदू धर्म में, यह भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु इस दुर्गम यात्रा पर निकलते हैं, जो उनके विश्वास और सहनशक्ति की परीक्षा होती है। भारत सरकार द्वारा आयोजित यह यात्रा, भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

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