देहरादून-केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए दो साल पुरानी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा लागू कर दिया है। इस फैसले के तहत राज्य के करीब 10 लाख परिवारों को हर महीने 5 किलो सस्ता गेहूं मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
हालांकि दूसरी ओर राज्य में चावल की आपूर्ति को लेकर संकट की स्थिति बनी हुई है। कई जिलों में समय पर चावल नहीं पहुंच पाने के कारण सरकारी राशन दुकानों पर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। दिसंबर माह में चावल की कमी के चलते कई जगहों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
सरकार का मानना है कि जब तक चावल की सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक गेहूं वितरण से हालात को संभाला जा सकता है। इससे गरीब परिवारों को भोजन की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और राशन व्यवस्था में संतुलन बना रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार चावल संकट का असर मिड-डे मील योजना पर भी पड़ सकता है, क्योंकि कई स्कूलों में चावल की आपूर्ति से ही भोजन तैयार होता है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आने वाले समय में चावल की सप्लाई भी जल्द सामान्य की जाएगी।
कुल मिलाकर, सस्ता गेहूं लोगों के लिए राहत बनकर आया है, लेकिन चावल की कमी अब भी सरकार और आम जनता दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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