April 18, 2026

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किसे मिला मरणोपरांत प्रदेश का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान? सीएम आवास में हुआ खास खुलासा!

देहरादून-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक गरिमामय एवं सादगीपूर्ण समारोह में प्रख्यात हिन्दी साहित्यकार स्व. शैलेश मटियानी को प्रदत्त उत्तराखण्ड गौरव सम्मान–2025 उनके पुत्र राकेश मटियानी को सौंपा। यह सम्मान मटियानी जी के दीर्घ साहित्यिक योगदान, हिन्दी कहानी जगत में उनके अमूल्य प्रभाव और उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने हेतु प्रदान किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि शैलेश मटियानी मात्र साहित्यकार नहीं, संवेदना और यथार्थ को शब्दों में पिरोने वाले अद्वितीय शिल्पी थे। आधुनिक हिन्दी कहानी आंदोलन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। आम लोगों की पीड़ा, संघर्ष और जीवन के विविध आयामों को उन्होंने जिस दमदार और सजीव भाषा में व्यक्त किया, उसने उन्हें भारतीय साहित्य के शीर्ष रचनाकारों की श्रेणी में स्थापित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उन महान प्रतिभाओं के योगदान को सदैव सम्मानित करती है, जिन्होंने अपनी लेखनी और रचनात्मकता से पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। मटियानी जी की कृतियाँ — “बोरीवली से बोरीबन्दर”, “मुठभेड़”, “अर्धांगिनी”, “चील” आदि — आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और हिन्दी साहित्य में उनका अद्वितीय स्थान है।

उन्होंने आगे कहा कि मरणोपरांत यह सम्मान परिवार को सौंपना राज्य सरकार के लिए गर्व का विषय है। साहित्यकारों का सम्मान समाज की सांस्कृतिक समृद्धि का सम्मान है।

स्व. मटियानी के पुत्र राकेश मटियानी ने उत्तराखण्ड सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान न केवल परिवार बल्कि प्रदेश के सभी साहित्य प्रेमियों के लिए गौरव का क्षण है।

कार्यक्रम में सचिव विनोद कुमार सुमन, वरिष्ठ अधिकारी, साहित्यकार और परिवारजन उपस्थित रहे।