भारत सरकार के सख्त रुख के बाद Meta ने मांगी माफी, डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री पर उठे सवाल
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 6 अगस्त 2026 | 07:07 AM4

नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026
Meta Platforms के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के समक्ष Facebook और Instagram पर बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री (CSAM), डीपफेक कंटेंट तथा प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ गंभीर त्रुटियों को लेकर खेद व्यक्त किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अवैध और हानिकारक सामग्री के प्रसार को लेकर लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है।
क्या है पूरा मामला?
हाल के दिनों में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से Facebook और Instagram पर कथित रूप से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और उससे संबंधित विज्ञापनों को लेकर जवाब मांगा था। सरकार ने कंपनी को ऐसे कंटेंट को तत्काल हटाने और यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि यह सामग्री प्लेटफॉर्म पर कैसे पहुंची।
इसके बाद Meta अधिकारियों और भारत सरकार के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। इन्हीं बैठकों के दौरान कंपनी की ओर से अपनी परिचालन संबंधी कमियों पर खेद व्यक्त किया गया।
किन मुद्दों पर जताया गया खेद?
- Facebook और Instagram पर CSAM (Child Sexual Abuse Material) से जुड़ी सामग्री का सामने आना।
- डीपफेक कंटेंट की पहचान और रोकथाम में कमियां।
- प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई तकनीकी और नीतिगत त्रुटियां।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट के गलती से प्रतिबंधित (Restrict) होने की घटना।
Meta ने क्या कहा?
Meta ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) के प्रति ‘Zero Tolerance Policy’ है। कंपनी के अनुसार ऐसे कंटेंट की पहचान करने, उसे हटाने और संबंधित खातों पर कार्रवाई करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों और अन्य सुरक्षा प्रणालियों का लगातार उपयोग किया जा रहा है।
Meta का कहना है कि भारत में सामने आए मामलों के बाद कई आपत्तिजनक विज्ञापन हटाए गए, संदिग्ध खातों पर कार्रवाई की गई और ऐसे कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए अतिरिक्त तकनीकी उपाय लागू किए गए हैं।
सरकार का रुख
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों का पूर्ण पालन करना होगा। यदि किसी प्लेटफॉर्म पर अवैध या हानिकारक सामग्री को समय पर नहीं हटाया जाता है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का यह भी कहना है कि बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल सुरक्षा और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
भारत Meta के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत Meta के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। देश में करोड़ों लोग Facebook, Instagram और WhatsApp का उपयोग करते हैं। ऐसे में भारत सरकार द्वारा डिजिटल सुरक्षा को लेकर अपनाया गया सख्त रुख वैश्विक टेक कंपनियों की नीतियों और उनकी जवाबदेही पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है।
निष्कर्ष
डीपफेक, ऑनलाइन सुरक्षा और बाल संरक्षण जैसे मुद्दे दुनिया भर में चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत सरकार और Meta के बीच हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों से कंटेंट मॉडरेशन और उपयोगकर्ता सुरक्षा के मामले में और अधिक जवाबदेही की अपेक्षा की जाएगी।
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