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हरिद्वार: निठारी कांड के पूर्व आरोपी सुरेंद्र कोली का शव चाय के खोखे में फंदे से लटका मिला, जांच में जुटी पुलिस

मुख्य संपादकप्रकाशित: 19 सितंबर 2026 | 02:06 PM16

हरिद्वार: निठारी कांड के पूर्व आरोपी सुरेंद्र कोली का शव चाय के खोखे में फंदे से लटका मिला, जांच में जुटी पुलिस

देश के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे मंगरूरखाल निवासी सुरेंद्र कोली का शव उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित नगर कोतवाली क्षेत्र में एक चाय के खोखे में फंदे से लटका हुआ पाया गया है। घटना सप्तसरोवर मार्ग की है, जहां उसने महज तीन दिन पहले ही यह खोखा किराए पर लिया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि घटनास्थल से कोई स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। मृतक के पास से दो अलग-अलग पहचान पत्र बरामद हुए हैं, जिनमें एक पहचान पत्र में उसका नाम सदाराम और दूसरे में सुरेंद्र कोली दर्ज है। पुलिस प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहनता से तफ्तीश शुरू कर दी है।

घटनाक्रम और पृष्ठभूमि

हरिद्वार पुलिस के अनुसार, शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे नगर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत सप्तसरोवर मार्ग पर स्थित एक चाय की दुकान में एक व्यक्ति का शव फंदे से लटके होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना करते हुए शव को नीचे उतारा।

शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर पूछताछ के दौरान मृतक की पहचान सदाराम निवासी अल्मोड़ा के रूप में सामने आई थी। लेकिन जब पुलिस ने मौके पर मौजूद खोखे की तलाशी ली, तो वहां रखे एक बैग से दो अलग-अलग पहचान पत्र बरामद हुए। एक पहचान पत्र में सदाराम पुत्र शंकर निवासी अल्मोड़ा अंकित था, जबकि आधार कार्ड में सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर निवासी सेक्टर 31, नोएडा, गौतमबुद्धनगर दर्ज पाया गया।

दस्तावेजों के मिलान और गहन पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मृतक वही सुरेंद्र कोली है, जो वर्ष 2006 में नोएडा में सामने आए चर्चित निठारी कांड में मुख्य आरोपी रहा था। इस मामले में उसे पूर्व में अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट से नवंबर 2025 में बरी होने के पश्चात वह जेल से रिहा हुआ था।

परिस्थितियाँ और वर्तमान स्थिति

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सुरेंद्र कोली ने तीन दिन पहले ही सप्तसरोवर मार्ग पर चाय का यह खोखा किराए पर लिया था और वह यहां अपनी पहचान छिपाकर ‘सदाराम’ के नाम से रह रहा था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसने यह कदम किन परिस्थितियों या मानसिक दबाव में उठाया, क्योंकि मौके से आत्महत्या के कारणों को लेकर कोई पुख्ता दस्तावेज या नोट मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सीओ सिटी हरिद्वार, शिशुपाल सिंह नेगी के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रतीत होता है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल के माध्यम से कराया जाएगा, ताकि मौत के वास्तविक समय और तकनीकी कारणों की स्पष्ट पुष्टि हो सके। इसके साथ ही पुलिस ने मृतक के परिजनों को विधिवत सूचना भेज दी है।

आम आदमी और सामाजिक व्यवस्था के लिए क्या मायने

यह घटना कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद संवेदनशील है। लंबे समय तक देश की सबसे बड़ी आपराधिक जांचों और न्यायिक प्रक्रियाओं का केंद्र रहे किसी व्यक्ति का जेल से रिहा होने के बाद इस तरह गुमनाम जिंदगी बिताना और फिर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया जाना, कानूनी व प्रशासनिक निगरानी के स्तर पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। स्थानीय स्तर पर किराएदारों और अस्थायी दुकानदारों के भौतिक सत्यापन (Police Verification) की अनिवार्यता कितनी गंभीर है, यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है। जब कोई व्यक्ति अपनी पहचान बदलकर किसी सार्वजनिक या भीड़भाड़ वाले इलाके में commercial गतिविधि शुरू करता है, तो स्थानीय प्रशासन व नागरिक सुरक्षा के लिए समय पर सत्यापन होना बेहद जरूरी हो जाता है।

निष्कर्ष

हरिद्वार के सप्तसरोवर मार्ग पर हुई इस घटना ने प्रशासनिक अमले को सतर्क कर दिया है। जहां एक ओर पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों का खुलासा करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि जेल से छूटने के बाद सुरेंद्र कोली किन लोगों के संपर्क में था और हरिद्वार पहुंचने से पहले वह कहां-कहां रहा। न्यायिक प्रक्रिया से बरी होने के बाद इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े व्यक्तियों की सामाजिक पुनर्स्थापना और स्थानीय सुरक्षा तंत्र के बीच तालमेल हमेशा एक गंभीर विषय बना रहता है। अब सभी की निगाहें पैनल द्वारा की जाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगामी तफ्तीश पर टिकी हैं।

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