हल्द्वानी- उजाला नगर के उजालेश्वर महादेव मंदिर के सामने 16 नवंबर की रात गोवंश का अवशेष मिलने के बाद हुए बवाल और फेसबुक पर विवादित टिप्पणी के मामले में हिंदूवादी नेता विपिन पांडे को शुक्रवार को कोर्ट ने न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा था, लेकिन शनिवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली। 16 नवंबर को अवशेष मिलने के बाद क्षेत्र का माहौल तनावपूर्ण हो गया था और सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों से स्थिति और बिगड़ गई थी, जिसके दौरान भीड़ ने कई गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की। इस मामले में पुलिस ने 40-50 अज्ञात लोगों समेत विपिन पांडे, यतिन पांडे और अतुल गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जमानत पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपित धाराएँ पांच साल से कम सजा वाली हैं और पुलिस ने गिरफ्तारी से पूर्व धारा 35(3) के तहत नोटिस भी जारी नहीं किया, साथ ही गिरफ्तारी भारी फोर्स के साथ बड़े अपराधी की तरह की गई। दूसरी ओर, विरोधी पक्ष ने दावा किया कि आरोपी पर पूर्व में भी ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज है, जबकि बचाव पक्ष ने उन मामलों को अप्रमाणित बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने विपिन पांडे की जमानत अर्जी स्वीकार कर उन्हें राहत प्रदान कर दी।
गोवंश अवशेष बवाल मामला: न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए विपिन पांडे को कोर्ट से राहत
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