नैनीताल

कुमाऊं द्वार महोत्सव में मुख्यमंत्री: लोक संस्कृति संरक्षण और युवाओं के भविष्य पर जोर

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 26 अक्टूबर 2026 | 01:09 AM1

कुमाऊं द्वार महोत्सव में मुख्यमंत्री: लोक संस्कृति संरक्षण और युवाओं के भविष्य पर जोर

हल्द्वानी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सांस्कृतिक आयोजनों की भूमिका को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने उत्तराखंड के लोगों के विरुद्ध की गई एक टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए प्रदेश के स्वाभिमान का मुद्दा उठाया।

महोत्सव में उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने हल्द्वानी के महत्व को बताते हुए कहा कि यह कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज के लिए विशेष महत्व रखता है और कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली व लोक कलाओं को एक व्यापक मंच प्रदान करता है। महोत्सव में जनसमूह की उपस्थिति को प्रदेशवासियों के अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरे जुड़ाव का प्रमाण बताया।

संस्कृति संरक्षण में युवाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री ने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के कार्यों की प्रशंसा की, जो लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से युवा पीढ़ी को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया में नई पहचान दिला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण बताया, जिसमें पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक मिलती है। उन्होंने छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी, न्योली, बेड़ा गीत, मांगल गीत और चैती गीत जैसी लोक विधाओं का उल्लेख किया। ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की विशिष्टता को भी रेखांकित किया, जिनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन की झलक मिलती है। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से उत्तराखंड के लोक संगीत की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान बनने और युवा पीढ़ी की इसमें रुचि बढ़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

देवभूमि की अस्मिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के भविष्य, जनहित और देवभूमि की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और भू-कानून जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने देवभूमि की अस्मिता की रक्षा को राज्य सरकार के लिए एक संकल्प बताया और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का उल्लेख किया। कानून के शासन को सुनिश्चित करना और प्रदेश के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता है।

युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के प्रयासों के तहत, उन्होंने नकल माफिया पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू करने और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में हुई प्रगति का जिक्र किया। पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरी प्रदान किए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के हित में बड़े और आवश्यक निर्णय लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी, क्योंकि प्रदेश का हित सत्ता, जनहित राजनीति और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है।

जिम्मेदार संवाद और न्याय की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों में प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां अत्यंत संवेदनशील हो जाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सम्मान से जुड़े विषयों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखना उचित है।

अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। उन्होंने इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में न्याय सर्वोपरि है और किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए।

अंतिम छोर तक विकास का संकल्प

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के संकल्प को विकास की यात्रा को प्रदेश के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के रूप में व्यक्त किया। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, प्रत्येक बहन-बेटी सशक्त बने और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली आए। उन्होंने प्रदेश की जनता के सहयोग, विश्वास और आशीर्वाद से उत्तराखंड के विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण के लक्ष्यों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने का विश्वास जताया।

शेयर करें:WhatsAppFacebook

संबंधित ख़बरें