देश-भारत में लागू होने जा रहे नए लेबर लॉ को लेकर कर्मचारियों में कई तरह की आशंकाएँ बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियमों से कंपनियों को तो प्रक्रियाएँ सरल होंगी, लेकिन कर्मचारियों को सीधे तौर पर नुकसान झेलना पड़ सकता है। सबसे बड़ा असर इन-हैंड सैलरी पर दिखेगा, क्योंकि नए प्रावधानों में बेसिक वेतन को कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत रखना अनिवार्य होगा, जिससे पीएफ और अन्य कटौतियाँ बढ़ जाएंगी और कर्मचारियों के हाथ में आने वाली राशि कम हो जाएगी। लंबे समय तक काम कराने की अनुमति मिलने से कुछ सेक्टरों में 12 घंटे की शिफ्ट का दबाव बढ़ सकता है, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है। छुट्टियों की गणना में बदलाव से earned leave का लाभ भी कम हो सकता है। इसके अलावा नए लेबर कोड कंपनियों को अधिक लचीलापन देते हैं, जिससे कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार बढ़ने और नौकरी की स्थिरता कम होने का खतरा है। कुल मिलाकर, नए नियम जहां उद्योगों के लिए सहज माहौल बना सकते हैं, वहीं कर्मचारियों की वेतन संरचना, आराम के समय और नौकरी सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
नए लेबर लॉ के नुकसान: कर्मचारियों पर बढ़ सकता है बोझ
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