मंत्रिमंडल ने कई अहम प्रस्तावों को दी मंजूरी, वन भूमि हस्तांतरण और भूमिधरी अधिकार पर महत्वपूर्ण निर्णय
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 4 अक्टूबर 2026 | 06:38 PM10

चंपावत, उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने राज्यहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों के तकनीकी परीक्षण और ऑनलाइन संरेखण के लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) के गठन को स्वीकृति मिली है। इस इकाई के लिए छह पदों की व्यवस्था भी की गई है।
बैठक में वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों/कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार प्रदान करने का निर्णय लिया गया। नैनीताल जिले की लालकुआं नगर पंचायत और देहरादून जिले के जौनसार-बावर परगना में भूमि के विनियमितीकरण संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। इस विनियमितीकरण को वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष के लिए विस्तारित किया जाएगा, जिसके बाद प्रचलित सर्किल रेट लागू होगा।
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विस्तार के लिए धनराशि
मंत्रिमंडल ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तार हेतु हस्तांतरित परिसंपत्तियों के लिए उत्तराखंड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को 66.2916 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि अवमुक्त करने का भी निर्णय लिया है। इस राशि का उपयोग कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के अनुसार नवनिर्माण और अन्य विकास कार्यों पर किया जाएगा।
PAN सत्यापन और राजकोषीय प्रबंधन में संशोधन
संपत्ति के क्रय-विक्रय से संबंधित लेन-देन में खरीदार-विक्रेता और अन्य पक्षों द्वारा उपलब्ध कराए गए PAN के सत्यापन की व्यवस्था लागू करने को भी मंजूरी दी गई है। इससे फर्जी PAN के इस्तेमाल पर अंकुश लगेगा और आयकर विभाग को रिपोर्टिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी मिली है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP के 3 प्रतिशत और कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा GSDP के 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है। आपदा और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में निर्धारित सीमा से अधिक घाटे के लिए छूट का प्रावधान भी रहेगा।
वन विभाग और स्थानीय निकायों के संबंध में निर्णय
वन विभाग के विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में संशोधन करते हुए निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व को सूची से हटाकर मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊँ (नैनीताल) और मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल (पौड़ी) को विभागाध्यक्ष घोषित किया जाएगा। इससे वनाग्नि, दैवीय आपदा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी आपातकालीन स्थितियों में कार्यवाही में तेजी आने की उम्मीद है। मंत्रिमंडल ने छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने की मंजूरी भी दी, जिसमें पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के लिए वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर संस्तुतियां शामिल हैं।
आपराधिक न्याय प्रणाली और कर्मचारी आचरण नियमावली में बदलाव
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों को लागू करने हेतु अधिसूचना जारी करने को मंजूरी मिली है, जिसके तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित परिस्थितियों में सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति की जा सकेगी। उत्तराखंड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 को भी मंजूरी दी गई है, जिसमें कर्मचारियों की चल-अचल और बहुमूल्य संपत्ति से संबंधित प्रावधानों को अद्यतन किया जाएगा। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के क्रम में सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में भी आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
समूह ‘ग’ पदों पर भर्ती प्रक्रिया में संशोधन
राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर साक्षात्कार प्रक्रिया विखण्डन (संशोधन) नियमावली, 2026 का प्रख्यापन भी मंत्रिमंडल की मंजूरी से हुआ है। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल अधिकारी के पद को परिशिष्ट से हटाया जाएगा। उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा के कारण साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (कृत्यों का परिसीमन) (संशोधन) विनियम, 2026 के तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रान्तीय रक्षक दल अधिकारी के पद को लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा, क्योंकि यह राजपत्रित समूह ‘ख’ का पद है।
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