भारत-चीन सीमा व्यापार का शुभारंभ: पिथौरागढ़ से पहला भारतीय दल तकलाकोट पहुंचा
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 2 अगस्त 2026 | 08:52 AM9

पिथौरागढ़, 01 अगस्त 2026। पिथौरागढ़ जनपद के धारचूला स्थित ऐतिहासिक लिपूलेख दर्रे के माध्यम से वर्ष 2026 के भारत-चीन सीमा व्यापार का शनिवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर 16 भारतीय व्यापारियों और 4 हेल्परों का पहला दल सफलतापूर्वक चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र स्थित तकलाकोट मंडी पहुंचा, जहाँ आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के उपरांत व्यापारिक गतिविधियों का शुभारंभ किया गया।
व्यापारिक दल का सफल प्रवेश
उपजिलाधिकारी धारचूला, श्री आशीष जोशी ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई की शाम लगभग 5:00 बजे, भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष श्री जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में 16 पंजीकृत व्यापारी एवं 4 हेल्परों सहित कुल 20 सदस्यों ने गुंजी स्थित इमीग्रेशन कार्यालय में निर्धारित आव्रजन प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की। इसके पश्चात्, सभी दल के सदस्यों ने नाबीढांग में रात्रि विश्राम किया।
सीमा पार कर व्यापार का शुभारंभ
अगले दिन, शनिवार प्रातः लगभग 10:15 बजे, लिपूलेख दर्रे पर चीनी अधिकारियों द्वारा सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए जाने के बाद, भारतीय व्यापारियों ने तिब्बत की सीमा में प्रवेश किया। तकलाकोट मंडी पहुंचकर व्यापारियों ने व्यापारिक गतिविधियों का शुभारंभ किया। यह कदम सीमांत क्षेत्र में व्यापार को पुनः गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
प्रारंभिक चरण में पूर्व पंजीकृत व्यापारियों को प्राथमिकता
उपजिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि चीन प्रशासन के निर्देशों के अनुसार, प्रथम चरण में केवल उन्हीं व्यापारियों को प्रवेश की अनुमति प्रदान की गई है जो पहले से पंजीकृत हैं और पूर्व में व्यापार कर चुके हैं। इस कारण, वर्तमान दल भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गया है। व्यापारी तकलाकोट में पूर्व से उपलब्ध अपनी व्यापारिक सामग्री और उससे संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए व्यापार का संचालन करेंगे। यह व्यवस्था शुरुआती दौर में सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
आगामी व्यापारिक दलों की योजना
आगामी व्यापारिक दलों के चीन प्रस्थान की तिथियों के निर्धारण के संबंध में चीनी प्रशासन के साथ ई-मेल के माध्यम से नियमित समन्वय और पत्राचार जारी है। जैसे ही अगले बैचों के लिए अनुमति और तिथियां प्राप्त होंगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से तकलाकोट मंडी भेजा जाएगा। इस व्यवस्थित दृष्टिकोण से सभी पंजीकृत व्यापारियों को अवसर मिल सकेगा।
सीमावर्ती क्षेत्र के लिए आर्थिक लाभ
भारत-चीन सीमा व्यापार के पुनः प्रारंभ होने से सीमांत क्षेत्र की पारंपरिक व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इसके अतिरिक्त, स्थानीय व्यापारियों, सीमावर्ती क्षेत्रों की आजीविका तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी इससे महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। यह व्यापार दोनों देशों के बीच वर्षों से चली आ रही पारंपरिक सीमा व्यापार व्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान में सहायक सिद्ध होगा।
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