देहरादून: हिमालयन भोजनालय से महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर, पहाड़ी व्यंजनों की बढ़ी मांग
गीता जोशी (संपादक)24 जुलाई 2026 | 10:55 PM20

देहरादून, जिला प्रशासन की एक अनूठी पहल के तहत संचालित हिमालयन भोजनालय पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय लोगों को पारंपरिक पहाड़ी स्वाद के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही, स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के लिए ये भोजनालय रोज़गार और आत्मनिर्भरता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गए हैं। रीप परियोजना के सहयोग से संचालित इन फूड वैन के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री भी बढ़ी है।
प्रशासन की अभिनव पहल
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशन में, जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को पहाड़ी व्यंजनों का अनुभव कराना और स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। रीप परियोजना के सहयोग से, जिले के विभिन्न विकासखंडों में ‘वे साइड एअट्रीज’ के रूप में हिमालयन भोजनालय फूड वैन संचालित की जा रही हैं। मई 2026 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत, 10 हिमालयन भोजनालय फूड वैन संचालित हैं, जिनका संचालन समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में, रायपुर ब्लॉक में 1, डोईवाला में 1, विकासनगर में 1, सहसपुर में 5 और कालसी में 2 हिमालयन भोजनालय सक्रिय हैं।
रोज़गार और आर्थिक सशक्तिकरण
कम्युनिटी बेस्ड ऑर्गेनाइजेशन (सीबीओ) लेवल के तहत, समूह की महिलाएँ लगभग 10 लाख रुपये की लागत से अपना रोज़गार शुरू कर रही हैं। इस राशि में 6 लाख रुपये रीप परियोजना से, 3 लाख रुपये बैंक ऋण के माध्यम से और 1 लाख रुपये समूह की महिलाओं के स्वयं के अंशदान से जुटाए जा रहे हैं। हिमालयन भोजनालय महिलाओं को रोज़गार का एक बेहतर मंच प्रदान कर रहे हैं। इन भोजनालयों के माध्यम से महिलाएँ प्रतिदिन लगभग 2 हजार रुपये तक की बचत कर रही हैं, जबकि यात्रा मार्गों पर संचालित हिमालय किचन से 3 से 4 हजार रुपये तक की बचत हो रही है। यह पहल महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
स्थानीय उत्पादों की बढ़ी मांग
हिमालयन भोजनालय में केवल पौष्टिक भोजन ही नहीं, बल्कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए स्थानीय पहाड़ी उत्पादों की भी अच्छी बिक्री हो रही है। इनमें पल्लर, अचार, हरा नमक, देसी घी, हल्दी, मिर्च, झंगोरा, विभिन्न प्रकार की दालें और पहाड़ी मंडुवा जैसे उत्पाद शामिल हैं। पर्यटकों और यात्रियों के बीच इन स्थानीय उत्पादों की काफी माँग देखी जा रही है, जो उन्हें उत्तराखंड की संस्कृति और स्वाद का अनुभव कराते हैं।
यात्रियों को पसंद आ रहा पौष्टिक भोजन
हिमालय भोजनालय में भोजन का आनंद ले रहे यात्रियों ने समूह की महिलाओं द्वारा प्यार और पहाड़ी अंदाज में परोसे जा रहे भोजन की सराहना की है। उन्होंने सरकार की इस पहल को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
विस्तार की योजना
जिला परियोजना प्रबंधक, सोनम गुप्ता के अनुसार, समिति बेस्ड ऑर्गेनाइजेशन लेवल के अंतर्गत क्लस्टर लेवल फेडरेशन की समूह महिलाओं को 10 लाख रुपये की परियोजना के माध्यम से हिमालयन भोजनालय फूड वैन स्थापित की जा रही हैं। पर्यटकों की अधिक आवाजाही को देखते हुए, जल्द ही चकराता के हनोल मंदिर क्षेत्र के निकट भी एक हिमालयन भोजनालय स्थापित किया जाएगा। मालदेवता और छिद्दरवाला में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और महिलाओं को हो रहे मुनाफे को देखते हुए इस पहल का विस्तार किया जा रहा है।
ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का उदाहरण
मुख्य विकास अधिकारी, अभिनव शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, रीप परियोजना ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। ‘वे साइड एअट्रीज’ का कॉन्सेप्ट दून जिले में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जहाँ ब्लॉक स्तर पर चयनित स्वयं सहायता समूहों को फूड वैन उपलब्ध कराई गई हैं। इससे वे न केवल अपना रोज़गार चला रही हैं, बल्कि अपने स्थानीय उत्पादों की बिक्री भी कर रही हैं। यात्रा मार्गों पर इन भोजनालयों को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त आकर्षण केंद्र
जिला प्रशासन की इस पहल से शुरू हुए हिमालय भोजनालय, पहाड़ी स्वाद, संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। आरामदायक बैठने की व्यवस्था, पहाड़ी उत्पादों के लिए आकर्षक डिस्प्ले, पारंपरिक पहाड़ी थीम के साथ फ्लेक्सिबल आउटलुक और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किचन इन भोजनालयों को यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
चारधाम यात्रा से व्यापार को मिली गति
डोईवाला, विकासनगर, कालसी और सहसपुर क्षेत्रों में, विशेष रूप से चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित फूड वैन, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोज़गार के बेहतर अवसर प्रदान कर रही हैं। इन क्षेत्रों में पहाड़ी उत्पादों की बिक्री में भी तेज़ी देखी जा रही है, जिससे महिलाओं के व्यापार को एक नया मंच मिला है।
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