सहसपुर की महिलाएँ 'हर घर तिरंगा' अभियान में फहरा रहीं दून का हैंडमेड तिरंगा
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 9 अगस्त 2026 | 04:53 PM1

देहरादून, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को सहसपुर ब्लॉक की स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ साकार कर रही हैं। ग्रामीण महिलाओं के हाथों से तैयार हो रहा सूती कपड़े का हैंडमेड तिरंगा इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को नई गति प्रदान कर रहा है।
महिलाएँ बना रहीं राष्ट्रीय ध्वज
सहसपुर ब्लॉक के शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट में समूह की महिलाओं ने अब तक 5,000 से अधिक तिरंगे तैयार कर लिए हैं। रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) और एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से तिरंगों की लगातार बढ़ती मांग से महिलाओं के हुनर और अपनी प्रतिभा दिखाने का एक सुनहरा अवसर भी मिल रहा है।
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी के लिए बड़ी संख्या में राष्ट्रीय ध्वज तैयार करता है। स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न राजनीतिक दलों से भी इन हैंडमेड तिरंगों की अच्छी मांग रहती है। हैंडमेड तिरंगा निर्माण ने ग्रामीण महिलाओं को न केवल रोजगार दिया है, बल्कि आत्मसम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की नई पहचान भी दिलाई है। बीते 26 जनवरी के अवसर पर तिरंगा निर्माण एवं बिक्री से समूह की महिलाओं ने लगभग 1 लाख रुपये की बचत अर्जित की।
यूनिट बनी स्वरोजगार का साधन
शंकरपुर स्थित सिलाई यूनिट का सफल संचालन कर रही जयमाला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं को ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक साधन बताया। जयमाला ने बताया कि इस यूनिट के माध्यम से ग्रामीण महिलाएँ रोजगार के लिए सशक्त हुई हैं। साथ ही उन्हें विभाग की मदद से कई राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के ऑर्डर भी मिलते हैं, जिससे उन्हें बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि घर के पास ही काम मिलने से महिलाएँ परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आय भी अर्जित कर रही हैं।
15 अगस्त और 26 जनवरी में रहती है अधिक माँग
आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत चांदनी स्वयं सहायता समूह की सदस्य कविता ने बताया कि 15 अगस्त और 26 जनवरी में राष्ट्रीय ध्वज बनाने की माँग अधिक आती है। कविता ने बताया कि शंकरपुर में स्थापित इस सिलाई यूनिट के माध्यम से सभी समूह की महिलाएँ अपना रोजगार चला रही हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर सरकारी विभाग, ब्लॉक कार्यालय, स्कूल-कॉलेज, राजनीतिक पार्टियों और लोकल मार्केट से अच्छा व्यापार मिलता है। कविता ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि सिलाई यूनिट की पहल से न केवल उन्हें रोजगार मिला, बल्कि उन्हें अपनी अलग पहचान दिखाने का अवसर भी प्राप्त हो रहा है।
विभाग भी खरीद रहा महिलाओं के हैंडमेड तिरंगे
जिला परियोजना प्रबंधक रीप, सोनम गुप्ता ने बताया कि रीप परियोजना के तहत सहसपुर ब्लॉक में सिलाई यूनिट की स्थापना की गई थी। इसी यूनिट में आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन की महिलाएँ राष्ट्रीय ध्वज बनाने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी 15 अगस्त और 26 जनवरी के लिए ये महिलाएँ राष्ट्रीय ध्वज बनाती आ रही हैं। यूनिट के स्थापित होने से इस बार महिलाएँ बड़े स्तर पर झंडे बनाने का कार्य कर रही हैं। सोनम ने बताया कि इस यूनिट में 15 से 20 महिलाएँ राष्ट्रीय ध्वज बनाने का कार्य कर रही हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यकता को देखते हुए समूह की महिलाओं से तिरंगे भी खरीदे जा रहे हैं।
‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग क्लस्टर से खरीद रहे तिरंगे
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि मा. मुख्यमंत्री के निर्देशन में रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) और एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की ग्रामीण महिलाएँ अपने पसंदीदा क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 15 अगस्त को देखते हुए समूह की महिलाएँ विभिन्न आकार के झंडे बना रही हैं। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन भी उनसे राष्ट्रीय ध्वज खरीद रहा है, साथ ही उनकी लोकल मार्केट में भी अच्छी खासी माँग है। मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े लोग भी समूह की महिलाओं से अच्छी क्वालिटी वाले तिरंगे खरीद रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और उनके काम को प्रोत्साहन मिल रहा है।
आय सृजन के साथ राष्ट्रीय उत्सव में अच्छा परिचय
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि रीप (ग्रामीण उद्यमिता एवं आजीविका परियोजना) के सहयोग से ग्रामीण समूह की महिलाएँ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हिस्सा ले रही हैं साथ ही राष्ट्रीय ध्वज बनाकर अपनी आय भी सृजित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएँ न केवल स्वरोजगार स्थापित कर रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय उत्सव में अपनी प्रतिभा का परिचय भी पेश कर रही हैं।
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