अल्मोड़ा

मत्स्य पालन से यशपाल सिंह ने बदली तस्वीर, स्वरोजगार से बने आत्मनिर्भर

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 17 अक्टूबर 2026 | 03:59 PM10

मत्स्य पालन से यशपाल सिंह ने बदली तस्वीर, स्वरोजगार से बने आत्मनिर्भर

अल्मोड़ा, विकासखंड हवालबाग के ग्राम भाटनयालजूला निवासी यशपाल सिंह ने वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन को अपनाकर ग्रामीण स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मिसाल कायम की है। उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने इस व्यवसाय को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन बनाया है। उनकी इस पहल में उनकी पत्नी पुष्पा देवी और परिवार के अन्य सदस्य भी सहयोग कर रहे हैं।

यशपाल सिंह कुल 16 मत्स्य पालन तालाब इकाइयों में मछली पालन कर रहे हैं। इन तालाबों में योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य उत्पादन किया जाता है। मत्स्य बीज के उचित संचयन, गुणवत्तापूर्ण आहार का प्रबंधन, तालाबों की नियमित साफ-सफाई तथा जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देकर उत्पादन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके बेहतर प्रबंधन और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि इन 16 तालाब इकाइयों से प्रतिवर्ष लगभग 8.00 कुन्तल मत्स्य उत्पादन प्राप्त हो रहा है।

उत्पादित मछलियों का स्थानीय बाजार में विक्रय कर यशपाल सिंह अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य पालन से उन्हें लगभग ₹2.40 लाख की अनुमानित वार्षिक सकल आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका के नए अवसर विकसित हुए हैं। सकल आय में से मत्स्य बीज, आहार, रखरखाव और अन्य संचालन संबंधी व्यय घटाने के बाद वास्तविक शुद्ध आय निर्धारित होती है।

वैज्ञानिक तकनीकों को देते हैं महत्व

मत्स्य पालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यशपाल सिंह वैज्ञानिक तकनीकों और उचित प्रबंधन को महत्व देते हैं। तालाबों में मत्स्य बीज की उचित मात्रा, संतुलित आहार, जल की गुणवत्ता की निगरानी और मछलियों के स्वास्थ्य का नियमित ध्यान रखकर वे उत्पादन को बेहतर बनाए रखने का प्रयास करते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध जल संसाधनों का योजनाबद्ध और वैज्ञानिक उपयोग करके ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन को आयवृद्धि और स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा सकता है।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणा

यशपाल सिंह की यह सफलता अन्य किसानों और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। उनका प्रयास दर्शाता है कि पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन जैसे आजीविका आधारित व्यवसायों को अपनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। उनका लक्ष्य उपलब्ध तालाबों की क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इस व्यवसाय को और अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना है। यशपाल सिंह की यह सफलता ग्रामीण संसाधनों के सदुपयोग, मेहनत, वैज्ञानिक तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायी मिसाल है।

शेयर करें:WhatsAppFacebook

संबंधित ख़बरें