अल्मोड़ा

बीएसएनएल कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी, मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 30 जुलाई 2026 | 03:06 PMअपडेट: 30 जुलाई 2026 | 03:07 PM169

बीएसएनएल कर्मचारियों का धरना तीसरे दिन भी जारी, मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

अल्मोड़ा, 30 जुलाई। बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में प्रस्तावित संगठनात्मक पुनर्गठन के विरोध और कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल (AUAB) के संयुक्त बैनर तले चल रहा धरना-प्रदर्शन गुरुवार को भी जारी रहा। प्रचालन क्षेत्र अल्मोड़ा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न यूनियनों एवं एसोसिएशनों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा कर्मचारी हितों से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग दोहराई।

पुनर्गठन नीति पर जताई आपत्ति

आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि उत्तराखंड में लागू किए जा रहे संगठनात्मक पुनर्गठन (पायलट प्रोजेक्ट) को वर्तमान स्वरूप में लागू करना कर्मचारियों और संगठन दोनों के हित में नहीं होगा। उनका कहना है कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से भिन्न हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखे बिना नई व्यवस्था लागू करने से कार्य संचालन और सेवा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों का मानना है कि किसी भी बड़े प्रशासनिक बदलाव से पहले कर्मचारी संगठनों के साथ व्यापक चर्चा कर उनके सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया जाना चाहिए।

लंबित मांगों को लेकर उठाई आवाज

धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने वर्ष 2017 से लंबित वेज रिवीजन को लागू करने, पदोन्नति एवं करियर प्रोग्रेशन से जुड़े मामलों का निस्तारण करने, एनईपीपी, विभिन्न भत्तों तथा मानव संसाधन से जुड़े अन्य लंबित प्रकरणों का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई। इसके साथ ही ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को 20 प्रतिशत एचआरए, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के विशेष भत्ते में वृद्धि तथा टेन्योर स्टेशनों पर तैनाती की अवधि कम किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

कर्मचारी हितों के साथ सेवाओं की गुणवत्ता पर भी जोर

धरने में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को उठाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना है जिससे कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहें और बीएसएनएल की सेवाएं भी प्रभावी ढंग से संचालित होती रहें। उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाता है तो इससे संगठन की कार्यक्षमता और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। वहीं लंबे समय से लंबित मामलों के कारण कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

 

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महासचिवों ने वर्चुअल माध्यम से कर्मचारियों को किया संबोधित

धरना-प्रदर्शन के दौरान ऑल यूनियन एवं एसोसिएशन से जुड़े विभिन्न यूनियनों एवं एसोसिएशनों के महासचिवों ने वर्चुअल माध्यम से कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी संगठन पूरी तरह एकजुट हैं और कर्मचारियों की मांगों को हर स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा। महासचिवों ने कहा कि यदि भारत सरकार एवं बीएसएनएल प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तो ऑल यूनियन एवं एसोसिएशन के संयुक्त नेतृत्व में राष्ट्रीय स्तर पर देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने सभी कर्मचारी संगठनों और कर्मचारियों से संगठन की एकता बनाए रखते हुए आगामी कार्यक्रमों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

हड़ताल की स्थिति बनी तो आपदा के मौसम में बढ़ सकती हैं चुनौतियां

उत्तराखंड में इन दिनों मानसून का दौर जारी है और राज्य के अनेक पर्वतीय जिले भूस्खलन, अतिवृष्टि तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे समय में दूरसंचार सेवाएं आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग और अन्य आपातकालीन एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने में बीएसएनएल नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया और आंदोलन आगे चलकर हड़ताल या देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का रूप लेता है, तो फील्ड स्तर पर होने वाले तकनीकी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इससे एफटीटीएच (ब्रॉडबैंड) कनेक्शन, नेटवर्क फॉल्ट का निस्तारण, केबल रखरखाव, नई सेवाओं की स्थापना, सिम से जुड़े कार्य तथा अन्य तकनीकी सेवाओं में विलंब की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा के समय संचार व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में फील्ड कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों का समय रहते समाधान केवल कर्मचारी हित का विषय नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं और आपदा के दौरान निर्बाध संचार व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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