पीएमजीकेएवाई: उत्तराखंड के 8.5 लाख लाभार्थियों में से 80,355 अपात्र पाए गए, 250 करोड़ की आर्थिक सहायता
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 30 जुलाई 2026 | 08:05 PM14

देहरादून, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) गरीबों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हुई है। इस योजना के तहत लाभार्थियों के सत्यापन और अपात्रों को हटाने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने संसद में एक अतारांकित प्रश्न के माध्यम से सामने रखी है।
उत्तराखंड को खाद्यान्न और आर्थिक सहायता
डॉ. नरेश बंसल के प्रश्न के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्रीमती निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान पीएमजीकेएवाई के तहत उत्तराखंड को कुल 401.459 हजार टन खाद्यान्न प्रति वर्ष आवंटित किया गया है। यह देश भर में आवंटित लगभग 52800 हजार टन प्रति वर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत राज्य को पिछले तीन वर्षों में लगभग 250 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जारी की गई है, जबकि पूरे देश में यह राशि लगभग 21500 करोड़ रुपये रही है।
अपात्र लाभार्थियों की पहचान और निष्कासन
‘राइटफुल टारगेटिंग’ अभ्यास के तहत, राज्यों में राशन कार्ड डेटाबेस की जांच की गई है। उत्तराखंड में लगभग 8.5 लाख लाभार्थियों की पहचान की गई, जिनमें से 80,355 अपात्र लाभार्थियों को सिस्टम से हटा दिया गया है। पूरे देश में लगभग 60 लाख लाभार्थियों की पहचान की गई और 23.5 लाख अपात्र लाभार्थियों को हटाया गया है। यह दर्शाता है कि योजना का लाभ केवल पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है।
पारदर्शिता के लिए निर्मल रियल-टाइम सत्यापन आर्किटेक्चर
लाभार्थियों के निरंतर सत्यापन के लिए ‘निर्मल रियल-टाइम सत्यापन आर्किटेक्चर’ को विभिन्न मंत्रालयों और संगठनों के डेटाबेस के साथ एकीकृत किया गया है। इनमें कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस), वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन)/केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), सड़क परिवहन मंत्रालय (एमओआरटीएच), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, रेल मंत्रालय और डाक विभाग शामिल हैं।
सत्यापन के लाभ
इन डेटा स्रोतों के एकीकरण से स्वचालित सत्यापन और अभिलेखों के क्रॉस-वैलिडेशन के माध्यम से संभावित अपात्र लाभार्थियों की निरंतर पहचान संभव हो पाती है। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में पारदर्शिता बढ़ती है, लाभार्थी डेटाबेस की सटीकता में सुधार होता है, राशन कार्ड रिकॉर्ड का नियमित अद्यतन आसान होता है और अपात्र लाभार्थियों को हटाने में सहायता मिलती है। यह सुनिश्चित करता है कि पीडीएस के तहत लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे।
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