चंपावत

चंपावत के किसानों को मिला नया बाजार: आईटीबीपी को भेजी गईं 16 क्विंटल से अधिक सब्जियां और फल

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 9 सितंबर 2026 | 12:50 PM6

चंपावत के किसानों को मिला नया बाजार: आईटीबीपी को भेजी गईं 16 क्विंटल से अधिक सब्जियां और फल

चंपावत, खबर 09 सितंबर 2026…

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के दूरदर्शी संकल्प और जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार के निर्देशों के अनुपालन में, स्थानीय कृषकों को सीधा लाभ पहुंचाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उत्तराखंड हॉर्टिकल्चर बोर्ड और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते (एमओयू) के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं।

किसानों को मिला नया बाजार

जिला उद्यान अधिकारी श्री योगेश भट्ट ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस एमओयू के फलस्वरूप, बुधवार को आईटीबीपी की मांग के अनुरूप कुल 1,619 किलोग्राम (16 क्विंटल 19 किलोग्राम) स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजी सब्जियों और फलों की सफलतापूर्वक आपूर्ति आईटीबीपी को कर दी गई है। यह पहल क्षेत्र के काश्तकारों को उनके कृषि उत्पादों का उचित मूल्य सीधे प्राप्त कराने में सहायक सिद्ध हो रही है।

बिचौलियों से मुक्ति और सीधा लाभ

मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप, किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर उनके उत्पादों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई है। आईटीबीपी जैसी प्रतिष्ठित वाहिनी को स्थानीय स्तर पर ताजी सब्जियां एवं फल उपलब्ध कराने से न केवल हमारे जवानों को पौष्टिक एवं ताजा राशन मिल रहा है, बल्कि स्थानीय किसानों की उपज की बिक्री के लिए एक स्थाई और भरोसेमंद व्यवस्था भी कायम हुई है।

आजीविका में सुधार की उम्मीद

जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार के मार्गदर्शन में, उद्यान विभाग निरंतर यह प्रयासरत है कि जनपद के अधिक से अधिक काश्तकार इस योजना से जुड़ें। भविष्य में, आईटीबीपी की मांग के अनुसार आपूर्ति की इस मात्रा को और अधिक बढ़ाने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर ही किसानों को एक बड़े बाजार का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आजीविका में अभूतपूर्व सुधार आने की उम्मीद है।

यह समझौता चंपावत जिले के किसानों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जो उन्हें सीधे बाजार से जोड़कर उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मदद कर रहा है। उद्यान विभाग और जिला प्रशासन इस पहल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

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