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क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी'? क्यों देशभर में हो रहे हैं प्रदर्शन, जानिए आंदोलन की पूरी कहानी

मुख्य संपादक22 जुलाई 2026 | 12:03 PM

क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’? क्यों देशभर में हो रहे हैं प्रदर्शन, जानिए आंदोलन की पूरी कहानी

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से CJP (Cockroach Janta Party) देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है। संसद के मानसून सत्र के दौरान आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प, विपक्षी दलों के समर्थन और सरकार के साथ वार्ता के बाद भी आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

क्या है CJP और कब हुई इसकी शुरुआत?

CJP (Cockroach Janta Party) की शुरुआत वर्ष 2026 में एक व्यंग्यात्मक (Satirical) सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी। इसकी शुरुआत अभिजीत दिपके ने की थी। शुरुआत में यह अभियान युवाओं के बीच सोशल मीडिया तक सीमित था, लेकिन बाद में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर यह एक बड़े छात्र-युवा आंदोलन में बदल गया। देखते ही देखते देश के कई राज्यों में हजारों छात्र और युवा इससे जुड़ गए।

आंदोलन क्यों शुरू हुआ?

संगठन का कहना है कि NEET-UG समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। CJP का आरोप है कि बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों के बावजूद जिम्मेदार लोगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। इसी को लेकर संगठन ने देशव्यापी आंदोलन शुरू किया।

CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

CJP ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख मांगें निम्न हैं—

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
  • सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तत्काल अस्पताल से मुक्त कर स्वतंत्र रूप से अपना आंदोलन जारी रखने की अनुमति देने की मांग। वांगचुक को अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जिस पर CJP ने आपत्ति जताई है।
  • NEET पेपर लीक विवाद के बाद कथित रूप से आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग।
  • परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई।

संसद मार्च के दौरान क्या हुआ?

मानसून सत्र के पहले दिन CJP ने दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया। बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान झड़प और बल प्रयोग की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें आईं। इसके बाद भी CJP ने स्पष्ट किया कि उसकी मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

राहुल गांधी समेत विपक्ष का समर्थन

मंगलवार को आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास की ओर मार्च निकाला। कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और छात्रों के मुद्दों पर संसद में चर्चा की मांग उठाई।

मार्च से पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया, जबकि सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए।

सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत तथा विश्वसनीय बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनका ज्ञापन लिया और मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया।

क्यों चर्चा में है CJP?

विशेषज्ञों का मानना है कि CJP अब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर उभर रही व्यापक नाराजगी का प्रतीक बन गया है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि सुधार की प्रक्रिया जारी है और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय कर सकती है।

फिलहाल CJP ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव भी लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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