अल्मोड़ा में वन बहाली और आजीविका संवर्धन को लेकर समीक्षा बैठक, धसपड़ ग्राम में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 24 अप्रैल 2026 | 03:33 PM2

अल्मोड़ा: जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में वन एवं वृक्ष आच्छादन की बहाली, भूमि क्षरण नियंत्रण और आजीविका संवर्धन के विषयों पर विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग परियोजना RECAP4NDC के अंतर्गत जिले में वन संरक्षण और सुरक्षा के लिए वन परिदृश्य पुनर्स्थापन दृष्टिकोणों के कार्यान्वयन की संभावनाओं को तलाशना था। जिलाधिकारी ने परियोजना के तकनीकी, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर विषय विशेषज्ञों और विभिन्न विभागीय अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान वन क्षेत्र में वृद्धि, भूमि क्षरण की रोकथाम, जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए समेकित और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि आईयूसीएन द्वारा उत्तराखंड राज्य के 30,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर अल्मोड़ा जिले के तीन प्रमुख क्लस्टरों धसपड़, नौगांव और चितई पंत को प्राथमिकता सूची में रखा गया है। बैठक में जागेश्वर रेंज के धसपड़ ग्राम को पायलट साइट के रूप में चुनकर कार्य शुरू करने पर सहमति बनी है।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य वनावरण बढ़ाना और वन संरक्षण करना है, इसलिए स्थानीय समुदायों को इस संबंध में पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि परियोजना से स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ सुनिश्चित किए जाएं और धरातल पर कार्बन प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता की भी जांच की जाए। इसके साथ ही चयनित क्षेत्रों में आजीविका से जुड़ी गतिविधियों की व्यावहारिक रूपरेखा बनाने पर बल दिया गया ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। जिलाधिकारी ने सभी कार्यों को परिणाम आधारित बनाने और उनके प्रभाव का नियमित मूल्यांकन सुनिश्चित करने की बात कही।
परियोजना के अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों के आकलन, पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन, क्षमता विकास और सामाजिक-आर्थिक अध्ययन को अनिवार्य घटकों के रूप में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। RECAP4NDC एक भारत-जर्मन तकनीकी सहयोग पहल है, जिसका लक्ष्य साल 2029 तक लगभग 4 लाख हेक्टेयर निम्नीकृत वन क्षेत्र को पुनर्स्थापित करना है। जीआईजेड द्वारा समर्थित यह परियोजना उत्तराखंड के साथ-साथ गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली में भी संचालित की जा रही है। उत्तराखंड में इसके तहत अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और पौड़ी गढ़वाल जैसे जनपदों में वन बहाली के लिए भूमि की पहचान की गई है।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी अल्मोड़ा प्रभाग दीपक सिंह, सिविल सोयम प्रभाग प्रदीप धौलाखंडी, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, परियोजना निदेशक डीआरडीए के एन तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त RECAP4NDC परियोजना की राज्य सलाहकार अपर्णा पांडे, आईयूसीएन से दीपिका क्षेत्री और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित विषय विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।
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