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अल्मोड़ा: मत्स्य पालन से स्वरोजगार का मॉडल बने देवेन्द्र सिंह, पहाड़ में संभावनाएं जगाईं

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 11 सितंबर 2026 | 07:22 PM17

अल्मोड़ा: मत्स्य पालन से स्वरोजगार का मॉडल बने देवेन्द्र सिंह, पहाड़ में संभावनाएं जगाईं

अल्मोड़ा, जनपद अल्मोड़ा के विकासखण्ड ताकुला के ग्राम पाटिया निवासी देवेन्द्र सिंह पुत्र पान सिंह ने मत्स्य पालन को एक सफल स्वरोजगार के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने मेहनत, लगन और विभागीय योजनाओं का लाभ उठाते हुए यह मुकाम हासिल किया है। एक छोटे से तालाब से शुरू हुई उनकी यह पहल आज चार तालाबों तक पहुँच चुकी है, जिससे उन्हें नियमित आय का साधन प्राप्त हो रहा है। साथ ही, वे क्षेत्र के अन्य ग्रामीणों, कृषकों और युवाओं को भी स्वरोजगार की नई दिशा दिखा रहे हैं।

एक तालाब से आत्मनिर्भरता का सफर

देवेन्द्र सिंह ने वर्ष 2023-24 में एक मत्स्य पालन तालाब से मछली पालन का कार्य शुरू किया। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने पूरी लगन और योजनाबद्ध तरीके से अपने कार्य को आगे बढ़ाया। उनके कार्य के प्रति समर्पण और रुचि को देखते हुए, मत्स्य विभाग ने वर्ष 2025-26 में उन्हें जिला योजना के अंतर्गत संचालित मत्स्य पालन तालाब निर्माण योजना के तहत तीन अतिरिक्त तालाबों से लाभान्वित किया। इससे उनके मत्स्य पालन कार्य का विस्तार हुआ और वर्तमान में वे चार तालाबों के माध्यम से मत्स्य पालन कर रहे हैं। विभागीय योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ लेकर उन्होंने मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीकों को भी अपनाया है।

विभागीय प्रशिक्षण से मिला वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वर्ष 2025-26 में देवेन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें मत्स्य प्रजातियों के चयन, तालाब प्रबंधन, मत्स्य आहार, उत्पादन वृद्धि और बेहतर मत्स्य पालन से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त हुई। प्रशिक्षण और विभागीय मार्गदर्शन का लाभ उठाते हुए, उन्होंने अपने तालाबों में विभिन्न प्रजातियों का सफलतापूर्वक पालन शुरू किया।

विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन, बढ़ी आय की संभावनाएं

वर्तमान में, देवेन्द्र सिंह द्वारा ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प, कॉमन/आमूर कार्प और रोहू प्रजातियों का सफलतापूर्वक पालन किया जा रहा है। उनके द्वारा एक वर्ष में लगभग 1.00 से 1.50 किलोग्राम वजन तक की ग्रास कार्प और आमूर कार्प का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 550 घन मीटर जल क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है तथा प्रतिवर्ष लगभग 3.00 से 3.50 कुंतल मछली का उत्पादन हो रहा है। यह उपलब्धि पहाड़ी क्षेत्रों में मत्स्य पालन की अपार संभावनाओं को प्रदर्शित करती है।

स्थानीय बाजार बना सफलता का आधार

देवेन्द्र सिंह ने केवल मछली उत्पादन तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि उत्पाद की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार से भी मजबूत जुड़ाव स्थापित किया है। उनके द्वारा उत्पादित मछलियों की आपूर्ति कफड़खान एवं दीनापानी क्षेत्र के होटल व्यवसायियों को की जाती है। इसके अतिरिक्त, आसपास के ग्रामीण और स्थानीय उपभोक्ताओं को भी ताजी मछली सीधे उपलब्ध कराई जाती है। स्थानीय स्तर पर ही बाजार उपलब्ध होने से परिवहन संबंधी लागत और विपणन की कठिनाइयों को कम करने में सहायता मिल रही है, तथा उपभोक्ताओं को भी ताजी मछली उपलब्ध हो रही है।

स्वयं रोजगार से बने दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत

मत्स्य पालन के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ते हुए, श्री देवेन्द्र सिंह अब एक सफल मत्स्य पालक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। वे समय-समय पर मत्स्य विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा आयोजित गोष्ठियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय रूप से प्रतिभाग करते हैं। वे अपने क्षेत्र में मत्स्य पालन कर रहे अन्य मत्स्य पालकों तथा कृषकों को भी मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देकर इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इस प्रकार, उनकी सफलता का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित न रहकर क्षेत्र के अन्य लोगों तक भी पहुंच रहा है।

पहाड़ में स्वरोजगार की नई संभावना

देवेन्द्र सिंह की सफलता इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध सीमित भूमि एवं जल संसाधनों का वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध उपयोग कर मत्स्य पालन को लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित किया जा सकता है। विभागीय योजनाओं का लाभ, तकनीकी प्रशिक्षण, वैज्ञानिक मत्स्य पालन पद्धति तथा स्थानीय बाजार से सीधा जुड़ाव – इन सभी के समन्वय से उन्होंने मत्स्य पालन को अपनी आर्थिक गतिविधि का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उनकी सफलता से क्षेत्र में मत्स्य पालन की संभावनाओं के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है और यह संदेश भी गया है कि पारंपरिक कृषि के साथ मत्स्य पालन को अतिरिक्त आय एवं स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाया जा सकता है।

प्रेरणादायक संदेश

देवेन्द्र सिंह की कहानी केवल एक व्यक्ति की आर्थिक प्रगति की कहानी नहीं, बल्कि “स्थानीय संसाधन, स्थानीय रोजगार, स्थानीय बाजार” की अवधारणा को साकार करने वाली प्रेरणादायक पहल है। एक तालाब से शुरू हुआ उनका सफर आज चार तालाबों तक पहुँच चुका है। उनकी मेहनत और विभागीय सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है। साथ ही, वे अन्य ग्रामीणों, कृषकों एवं युवाओं के लिए यह संदेश दे रहे हैं कि यदि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर मेहनत को अपनाया जाए तो पहाड़ में भी स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। देवेन्द्र सिंह की सफलता ग्रामीण आत्मनिर्भरता, स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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