Surya Grahan 2026: आज लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं और क्या है खास
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 12 अगस्त 2026 | 08:04 AM10

नई दिल्ली: साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार को होने जा रहा है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसे दुनिया के कुछ हिस्सों में बेहद शानदार खगोलीय घटना के रूप में देखा जा सकेगा। हालांकि, भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह ग्रहण खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, इस पूर्ण सूर्य ग्रहण का मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगा। उत्तरी गोलार्ध के कई अन्य क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। NASA की आधिकारिक जानकारी यहां पढ़ें।
12 अगस्त को होगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी का कुछ या पूरा हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य के पूरे दिखाई देने वाले हिस्से को ढक लेता है।
12 अगस्त 2026 को होने वाला ग्रहण इसी श्रेणी का पूर्ण सूर्य ग्रहण है। NASA के अनुसार, पूर्ण ग्रहण का अधिकतम चरण करीब 2 मिनट 18 सेकंड तक रह सकता है, हालांकि किसी स्थान पर ग्रहण कितनी देर दिखाई देगा, यह उसकी भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा।
भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
इस सूर्य ग्रहण को लेकर भारत में सबसे ज्यादा सवाल यही है कि क्या इसे यहां से देखा जा सकेगा। जवाब है—नहीं।
12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। पूर्ण ग्रहण की छाया का मुख्य मार्ग भारत से काफी दूर उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों से होकर गुजर रहा है। इसलिए भारत के अधिकांश हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को आसमान में प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे।
ग्रहण की वैश्विक दृश्यता और अलग-अलग स्थानों पर इसके समय की जानकारी Timeanddate के Solar Eclipse Tracker पर देखी जा सकती है।
कहां दिखाई देगा पूर्ण सूर्य ग्रहण?
NASA के मुताबिक 12 अगस्त 2026 के पूर्ण सूर्य ग्रहण का रास्ता पृथ्वी के उत्तरी हिस्से से होकर गुजरेगा। पूर्ण ग्रहण देखने के लिए प्रमुख स्थानों में शामिल हैं:
- ग्रीनलैंड
- आइसलैंड
- उत्तरी रूस
- स्पेन
- पुर्तगाल का एक छोटा हिस्सा
इसके अलावा यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। NASA द्वारा जारी ग्रहण मानचित्र में इसकी पूरी दृश्यता पट्टी को देखा जा सकता है।
कितने समय तक रहेगा ग्रहण?
पूरे ग्रहण की अवधि अलग-अलग चरणों और स्थानों के आधार पर अलग होगी। पूर्ण ग्रहण के अधिकतम चरण की अवधि लगभग 2 मिनट 18 सेकंड तक हो सकती है। हालांकि, सूर्य ग्रहण का आंशिक चरण इससे काफी अधिक समय तक दिखाई दे सकता है।
किसी खास शहर में ग्रहण कब शुरू होगा, कब अधिकतम होगा और कब समाप्त होगा, यह उस स्थान की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए ग्रहण देखने की योजना बनाने वालों को स्थानीय समय की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
भारत में सूतक काल लगेगा या नहीं?
सूर्य ग्रहण को लेकर भारत में धार्मिक दृष्टि से सूतक काल को लेकर भी चर्चा होती है। पारंपरिक मान्यताओं में सूतक की गणना ग्रहण की दृश्यता और स्थानीय धार्मिक पंचांग के आधार पर की जाती है।
चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए कई पंचांग और ज्योतिषीय स्रोत भारत में सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर सूतक लागू न होने की बात कहते हैं। हालांकि, सूतक से जुड़े नियम धार्मिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
इसलिए धार्मिक अनुष्ठान या व्यक्तिगत निर्णय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या संबंधित धार्मिक विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
क्या ग्रहण को सीधे आंखों से देखना सुरक्षित है?
भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन जहां भी सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां इसे देखते समय आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। सूर्य को बिना उचित सुरक्षा के सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
NASA भी सूर्य ग्रहण देखते समय उचित Solar Viewing Glasses या प्रमाणित सूर्य-दर्शन फिल्टर का इस्तेमाल करने की सलाह देता है। सामान्य धूप के चश्मे सूर्य ग्रहण देखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करते। NASA की Eclipse Safety जानकारी यहां देखें।
क्यों खास है 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण?
पूर्ण सूर्य ग्रहण हमेशा पृथ्वी के बहुत सीमित हिस्से से ही पूर्ण रूप में दिखाई देता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक देता है और कुछ समय के लिए सूर्य का चमकीला डिस्क दिखाई देना बंद हो जाता है। सही परिस्थितियों में सूर्य का बाहरी वायुमंडल यानी Corona भी दिखाई दे सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए भी पूर्ण सूर्य ग्रहण महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके दौरान सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। NASA के अनुसार, ग्रहण के दौरान कोरोना के उन हिस्सों का अध्ययन किया जा सकता है जो सामान्य परिस्थितियों में सूर्य की तेज रोशनी के कारण आसानी से दिखाई नहीं देते।
भारत में रहने वालों को क्या करना चाहिए?
भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां से इसे देखने के लिए किसी विशेष स्थान पर जाने की जरूरत नहीं होगी। अगर आप इस खगोलीय घटना को देखना चाहते हैं, तो उन देशों से आने वाले लाइव प्रसारण या वैज्ञानिक संस्थाओं की ऑनलाइन कवरेज देख सकते हैं जहां पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा।
साथ ही, ग्रहण को लेकर सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और अप्रमाणित दावों से सावधान रहना जरूरी है। सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जिसे विज्ञान के आधार पर समझा जा सकता है।
2026 में कितने सूर्य ग्रहण होंगे?
वर्ष 2026 में दो सूर्य ग्रहण होने हैं। पहला 17 फरवरी 2026 को वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) था, जबकि दूसरा 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। NASA की भविष्य के ग्रहणों की सूची में दोनों घटनाओं की जानकारी उपलब्ध है।
2026 और आने वाले सूर्य ग्रहणों की पूरी सूची NASA पर देखें।
निष्कर्ष
12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण साल की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में इसे सीधे आसमान में नहीं देखा जा सकेगा। इसका पूर्ण चरण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
भारत में रहने वाले लोग इस खगोलीय घटना की लाइव कवरेज के जरिए इसका अनुभव कर सकते हैं। वहीं, जहां ग्रहण दिखाई दे रहा है, वहां इसे देखने के लिए आंखों की सुरक्षा के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करना जरूरी है।
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