बीएसएनएल प्रबंधन की ओर से नहीं मिला कोई सकारात्मक जवाब, आंदोलन ने पकड़ी राष्ट्रीय रफ्तार
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 31 जुलाई 2026 | 02:54 PMअपडेट: 31 जुलाई 2026 | 03:23 PM149

अल्मोड़ा, 31 जुलाई। उत्तराखंड में प्रस्तावित संगठनात्मक पुनर्गठन के विरोध में चल रहा बीएसएनएल कर्मचारियों का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल (AUAB) के आह्वान पर शुक्रवार को देशभर के विभिन्न दूरसंचार परिक्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों ने लंच आवर प्रदर्शन कर उत्तराखंड में आंदोलनरत कर्मचारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। वहीं उत्तराखंड में कर्मचारियों का पूर्ण आंदोलन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लगातार जारी रहा।

देशभर के कर्मचारियों ने लंच आवर प्रदर्शन कर दिया समर्थन
उत्तराखंड में संगठनात्मक पुनर्गठन के विरोध में जहां बीएसएनएल कर्मचारी लगातार पूर्ण आंदोलन पर डटे हुए हैं, वहीं उनके समर्थन में देशभर के विभिन्न दूरसंचार परिक्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों ने लंच आवर के दौरान प्रदर्शन कर प्रबंधन का ध्यान कर्मचारियों की मांगों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि उत्तराखंड के कर्मचारियों की मांगें केवल एक सर्किल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य में पूरे संगठन और कर्मचारियों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय हैं।

प्रबंधन की चुप्पी से बढ़ रहा कर्मचारियों का आक्रोश
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उत्तराखंड में प्रस्तावित संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर लंबे समय से विरोध दर्ज कराया जा रहा है, लेकिन अब तक बीएसएनएल प्रबंधन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक पहल सामने नहीं आई है। उनका आरोप है कि लगातार ज्ञापन, वार्ता की मांग और शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद कर्मचारियों की आपत्तियों और सुझावों पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि प्रस्तावित एकतरफा बदलावों और संगठनात्मक पुनर्गठन से जुड़े विभिन्न निर्णयों पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। उनका आरोप है कि इस संबंध में लगातार आपत्ति दर्ज कराने और सुझाव देने के बावजूद अब तक बीएसएनएल प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या सार्थक पहल नहीं की गई है। उनका कहना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य की भौगोलिक एवं प्रशासनिक परिस्थितियां अन्य राज्यों से पूरी तरह भिन्न हैं। ऐसे में स्थानीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर लागू की गई व्यवस्था न केवल कर्मचारियों के लिए कठिनाइयां पैदा करेगी, बल्कि दूरसंचार सेवाओं के सुचारु संचालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई एकजुटता
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि उत्तराखंड में आंदोलन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूर्ण रूप से जारी रहेगा, जबकि अन्य दूरसंचार परिक्षेत्रों में कर्मचारियों ने लंच आवर प्रदर्शन के माध्यम से अपना समर्थन दर्ज कराया है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन पूरे बीएसएनएल परिवार की एकजुटता का प्रतीक है और इसका उद्देश्य प्रबंधन तक कर्मचारियों की आवाज को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में चल रहा आंदोलन केवल एक सर्किल का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भविष्य में पूरे संगठन की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के हितों से जुड़ा विषय है। इसी सोच के साथ देशभर के कर्मचारियों ने उत्तराखंड के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की है।
मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और व्यापक
ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ बीएसएनएल के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य संगठन के हितों की रक्षा करते हुए व्यावहारिक और न्यायसंगत समाधान प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि बीएसएनएल प्रबंधन ने कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की और पुनर्गठन से जुड़े विवादित निर्णयों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को आगामी चरणों में और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने सभी कर्मचारी संगठनों एवं कर्मचारियों से एकजुट रहकर आंदोलन को मजबूत बनाने और संगठन द्वारा घोषित आगामी कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
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