बीएसएनएल कर्मचारियों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, पुनर्गठन नीति और लंबित मांगों को लेकर बढ़ा असंतोष
गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 29 जुलाई 2026 | 02:08 PMअपडेट: 29 जुलाई 2026 | 02:24 PM217

अल्मोड़ा, 29 जुलाई। बीएसएनएल उत्तराखंड सर्किल में प्रस्तावित संगठनात्मक पुनर्गठन और लंबे समय से लंबित कर्मचारी हितों से जुड़े मामलों को लेकर कर्मचारियों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में ऑल यूनियन एवं एसोसिएशन के संयुक्त बैनर तले 28 जुलाई से शुरू हुआ तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रचालन क्षेत्र अल्मोड़ा मुख्यालय में विभिन्न यूनियनों एवं कर्मचारी संगठनों से जुड़े कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
पुनर्गठन नीति पर जताई गंभीर आपत्ति
धरने में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उत्तराखंड में लागू किए जा रहे संगठनात्मक पुनर्गठन (पायलट प्रोजेक्ट) से पहले कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पदोन्नति, कार्य व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बिना पर्याप्त विचार-विमर्श और कर्मचारी संगठनों की सहभागिता के इस तरह के बदलाव लागू करना भविष्य में विभागीय कार्यप्रणाली और कर्मचारियों दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।
वर्ष 2017 से लंबित वेतन संशोधन बना प्रमुख मुद्दा
आंदोलन के दौरान कर्मचारियों ने 1 जनवरी 2017 से लंबित वेज रिवीजन को तत्काल लागू करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि वर्षों से वेतन संशोधन नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय पर वेतन पुनरीक्षण न होने से कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित हुआ है।
पदोन्नति और करियर प्रगति में आ रही बाधाओं पर उठी आवाज
कर्मचारियों ने पदोन्नति से जुड़े लंबित मामलों को शीघ्र निस्तारित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि लंबे समय से प्रमोशन की प्रक्रिया प्रभावित होने से अनेक कर्मचारियों का करियर ठहराव का शिकार हो गया है। संगठनात्मक बदलाव से पहले इन समस्याओं का समाधान आवश्यक है, ताकि कर्मचारियों के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त सुविधाओं की मांग
धरने में ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को 20 प्रतिशत एचआरए देने, दूरस्थ एवं विशेष क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों के विशेष भत्ते में वृद्धि करने तथा कठिन क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले कर्मियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों का कहना है कि
आंदोलन वीडियो देखे-
वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें पर्याप्त आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए।
टेन्योर नीति और लंबित लाभों पर भी उठे सवाल
आंदोलन के दौरान टेन्योर स्टेशनों पर तैनाती की अवधि तीन वर्ष से घटाकर दो वर्ष करने, विभिन्न भत्तों, परिलाभों तथा एनईपीपी (NEPP) से जुड़े लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग भी रखी गई। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित ये विषय अब असंतोष का बड़ा कारण बन चुके हैं।
संवाद के बाद ही निर्णय लेने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संगठनात्मक पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि कर्मचारियों के अनुभव और सुझावों को शामिल किए बिना लिया गया कोई भी निर्णय भविष्य में व्यावहारिक कठिनाइयों को जन्म दे सकता है।

मांगों पर शीघ्र निर्णय की अपेक्षा
आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि यदि लंबित मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं हुआ तो इसका असर बीएसएनएल की कार्यप्रणाली, नेटवर्क संचालन और उपभोक्ता सेवाओं पर भी पड़ सकता है। कर्मचारियों ने प्रबंधन से कर्मचारी हितों को प्राथमिकता देते हुए पुनर्गठन संबंधी प्रस्तावों पर पुनर्विचार करने तथा सभी लंबित मामलों का जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
संबंधित ख़बरें

अल्मोड़ा में 'आशीर्वाद का दीया' के साथ सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ, 51 हजार दीयों से जगमगाया जनपद
17 सितंबर 2026 | 10:27 PM

अल्मोड़ा: हवालबाग RSETI में 14 दिवसीय जूट बैग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
17 सितंबर 2026 | 07:26 PM

अल्मोड़ा में जनगणना-2027 के द्वितीय चरण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
15 सितंबर 2026 | 08:05 PM

अल्मोड़ा में उदय शंकर की विरासत को जीवंत करने के लिए रंगमंच और फिल्म निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ
15 सितंबर 2026 | 11:08 AM