पहाड़ों में धूप, मैदानों में कोहरा: मौसम का उलटा मिज़ाज
मुख्य संपादकप्रकाशित: 18 दिसंबर 2025 | 08:24 AM4

सार-सर्दियों का मौसम अपने साथ हर साल कुछ न कुछ अलग तस्वीर लेकर आता है, लेकिन इस बार का नज़ारा थोड़ा खास है। एक ओर पहाड़ों में चटख धूप खिली हुई है, तो दूसरी ओर मैदानी इलाकों में कोहरे ने जनजीवन को जकड़ रखा है। यह विरोधाभास सिर्फ मौसम का नहीं, बल्कि भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते जलवायु पैटर्न का भी संकेत देता है।
विस्तार– पहाड़ों में क्यों खिली है धूप?
उत्तराखंड, हिमाचल और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में इस समय आसमान साफ है। बर्फबारी कम होने और पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने से ठंडी हवाएं तो हैं, लेकिन बादल नहीं। यही वजह है कि दिन के समय धूप लोगों को राहत दे रही है। पहाड़ों में रहने वाले लोग सुबह-शाम की ठंड के बावजूद दिन में खुलकर धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। यह धूप न सिर्फ तापमान को संतुलित कर रही है, बल्कि पर्यटन के लिहाज़ से भी अनुकूल माहौल बना रही है।
मैदानों में कोहरे की गिरफ्त
इसके ठीक उलट मैदानी इलाकों—दिल्ली-एनसीआर, यूपी, हरियाणा, पंजाब और बिहार—में घना कोहरा छाया हुआ है। रात के समय ठंडी हवाओं के साथ नमी बढ़ जाती है, जिससे कोहरा और स्मॉग मिलकर दृश्यता को बेहद कम कर देते हैं। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आते हैं, ट्रेनें और उड़ानें देरी से चलती हैं, और जनजीवन प्रभावित होता है।
इस उलटफेर की वजह क्या है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ों में साफ आसमान और मैदानों में कोहरे की मुख्य वजह तापमान और नमी का अंतर है। पहाड़ी इलाकों में हवा अपेक्षाकृत शुष्क रहती है, जबकि मैदानों में नदियों, खेतों और शहरी प्रदूषण के कारण नमी ज्यादा होती है। ठंडी हवा जब स्थिर हो जाती है, तो कोहरा बनना तय है।
आम लोगों पर असर
पहाड़ों में धूप से जहां बुजुर्गों और बच्चों को राहत मिल रही है, वहीं मैदानों में कोहरे के कारण स्कूल, ऑफिस और यातायात प्रभावित हैं। डॉक्टर भी सलाह दे रहे हैं कि कोहरे और ठंड में लोग सावधानी बरतें, खासकर बुजुर्ग और सांस के मरीज।
निष्कर्ष
“पहाड़ों में धूप, मैदानों में कोहरा” सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि भारत की विविध भौगोलिक पहचान को दर्शाता सच है। यह तस्वीर हमें बताती है कि मौसम हर इलाके में एक जैसा नहीं होता और हर क्षेत्र की अपनी चुनौतियां और राहतें होती हैं। बदलते मौसम के इस मिज़ाज में सावधानी और समझदारी ही सबसे बड़ा सहारा है।
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