नैनीताल

नैनीताल में भू-कानून का सख्त अनुपालन: 14 मामलों में 6.088 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 8 अगस्त 2026 | 01:14 PM20

नैनीताल में भू-कानून का सख्त अनुपालन: 14 मामलों में 6.088 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार में निहित

नैनीताल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए कड़े भू-कानूनों का असर नैनीताल जिले में दिखने लगा है। भू-कानून के उल्लंघन से जुड़े 14 मामलों में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अब तक कुल 6.088 हेक्टेयर भूमि, जो लगभग 304 नाली के बराबर है, को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई को भू-कानून के अनुपालन के प्रति सरकार की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विभिन्न प्रकार के उल्लंघन आए सामने

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि जिले में विभिन्न प्रकार से भू-कानूनों का उल्लंघन हुआ है। जांच में ऐसे कई मामले प्रकाश में आए, जिनमें बागवानी के उद्देश्य से अधिग्रहित भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन के लिए नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ परिवारों द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए, अलग-अलग सदस्यों के नाम पर निर्धारित भूमि सीमा से अधिक भूमि का क्रय किया गया। कृषि प्रयोजन के लिए आवंटित भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन भी पाया गया, जो कि भू-कानूनों के तहत अनुमत नहीं है।

अनुसूचित जाति की भूमि का अवैध विक्रय और व्यावसायिक उपयोग

अन्य प्रमुख उल्लंघनों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के व्यक्तियों से नियमानुसार विक्रय की जाने वाली भूमि का सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को अवैध रूप से विक्रय करना शामिल है। इसके अलावा, आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन भी पाया गया। इन सभी मामलों में भू-कानूनों के स्पष्ट उल्लंघन के कारण संबंधित भूमि को राज्य सरकार के अधीन करने की कार्रवाई की गई है।

जनहित में उपयोग की जाएगी निहित भूमि

प्रशासन के अनुसार, भविष्य में राज्य सरकार में निहित की गई इन भूमियों का उपयोग जनहित और सार्वजनिक कल्याण से जुड़े विभिन्न प्रयोजनों के लिए किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि का उपयोग प्रदेश के विकास और नागरिकों के हित में हो।

निष्पक्ष और पारदर्शी भूमि क्रय-विक्रय पर जोर

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इस संदर्भ में कहा कि राज्य सरकार की मंशा भूमि के क्रय-विक्रय की पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और पूर्णतः कानूनसम्मत बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भू-कानूनों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार के उल्लंघन को रोका जा सके।

भू-कानूनों का उल्लंघन एक गंभीर अपराध

उत्तराखंड में भू-कानूनों को इसलिए कड़ा किया गया है ताकि बाहरी लोगों द्वारा स्थानीय भूमि का अंधाधुंध अधिग्रहण रोका जा सके और राज्य के संसाधनों का संरक्षण हो। इन कानूनों का उद्देश्य अनियोजित विकास पर अंकुश लगाना और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करना भी है। भूमि के अवैध हस्तांतरण और गैर-अनुमत उपयोग पर की जा रही यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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