नैनीताल

नैनीताल: मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर हिंदी विभाग द्वारा साहित्य पर विचार गोष्ठी का आयोजन

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 31 जुलाई 2026 | 07:13 PM19

नैनीताल: मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर हिंदी विभाग द्वारा साहित्य पर विचार गोष्ठी का आयोजन

नैनीताल, खबर दिनांक 31 जुलाई 2026 को राजकीय महाविद्यालय, नैनीताल के हिंदी विभाग द्वारा महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मुंशी प्रेमचंद के समृद्ध साहित्य पर गहनता से प्रकाश डालना और नई पीढ़ी को उनकी रचनाओं से अवगत कराना था।

साहित्यिक चर्चा का केंद्रबिंदु

विचार गोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद के साहित्य की विभिन्न विधाओं, विशेषकर उनके उपन्यासों और कहानियों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रेमचंद की सामाजिक यथार्थवादिता, पात्रों के चित्रण, भाषा शैली और तत्कालीन समाज पर उनके साहित्य के प्रभाव का विश्लेषण किया। यह चर्चा प्रेमचंद की रचनाओं के साहित्यिक और सामाजिक महत्व को समझने का एक मंच बनी।

छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी

इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी प्रेमचंद की कृतियों पर अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य से प्रेरित होकर अपनी समझ और विश्लेषण को प्रस्तुत किया, जिससे गोष्ठी में एक जीवंत वातावरण बना। छात्र-छात्राओं की यह भागीदारी युवा पीढ़ी के बीच प्रेमचंद की प्रासंगिकता को दर्शाती है।

प्राध्यापकों द्वारा विस्तृत विवेचन

हिंदी विभाग के प्राध्यापकों ने भी गोष्ठी में अपने ज्ञान और अनुभव से प्रेमचंद के साहित्य पर विस्तृत प्रकाश डाला। डॉ. दीपा पंत, डॉ. हेमचंद दुबे और डॉ. नीता शाह ने प्रेमचंद की विशिष्ट लेखन शैली, उनके पात्रों की गहराई और सामाजिक कुरीतियों के प्रति उनके दृष्टिकोण पर गहन विवेचन प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यानों से उपस्थित जन को प्रेमचंद के साहित्य को एक नए दृष्टिकोण से समझने में सहायता मिली।

प्रेरणादायक उद्बोधन

महाविद्यालय की प्राचार्य, प्रोफेसर आभा शर्मा ने अपने संबोधन में छात्राओं को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य को गहराई से पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रेमचंद की रचनाओं को जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताया और कहा कि उनके साहित्य में आज भी प्रासंगिक संदेश छिपे हुए हैं, जो व्यक्ति के सामाजिक और नैतिक विकास में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

उपस्थित गण

इस महत्वपूर्ण अवसर पर महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। इस आयोजन ने न केवल मुंशी प्रेमचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि भारतीय साहित्य में उनके योगदान को भी रेखांकित किया।

आभार ज्ञापन

अंत में, हिंदी विभाग के प्रभारी, डॉ. नीता शाह ने सभी उपस्थित प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं और अन्य सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने इस विचार गोष्ठी की सफलता के लिए सभी के प्रयासों की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक आयोजनों के निरंतरता पर बल दिया।

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