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देहरादून: 15 अगस्त को शिक्षण संस्थानों में दिलाई जाएगी 'कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा'

गीता जोशी (संपादक)प्रकाशित: 13 अगस्त 2026 | 11:51 AM9

देहरादून: 15 अगस्त को शिक्षण संस्थानों में दिलाई जाएगी 'कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा'

देहरादून, बाल लिंगानुपात में सुधार तथा बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से देहरादून जनपद के समस्त शैक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त 2026 को ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ (Save The Girl Child Pledge) दिलाई जाएगी। यह पहल बालिकाओं के प्रति समाज की सोच को बदलने और उन्हें समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जिलाधिकारी के निर्देश

जिला समुचित प्राधिकारी, पीसीपीएनडीटी एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार, जनपद के सभी डिग्री कॉलेजों, विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त को अपने-अपने स्तर पर ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रतिज्ञा का उद्देश्य

इस प्रतिज्ञा के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विशेष रूप से लिंग भेद और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। प्रतिज्ञा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बेटियों को बेटों के समान प्यार, पोषण, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। साथ ही, बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के लिए सदैव प्रयासरत रहने का संकल्प दिलाया जाएगा।

सुरक्षित और गरिमामय वातावरण का निर्माण

प्रतिज्ञा में यह भी संकल्प लिया जाएगा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, समाज और आसपास ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास करे, जहां प्रत्येक बेटी स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सके। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे गरिमा और सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें। यह कदम समाज में महिलाओं और बालिकाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की भावना को बढ़ावा देगा।

शैक्षणिक संस्थानों की सहभागिता

जिला प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की है। संस्थानों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अधिक से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों और कार्मिकों को ‘कन्या भ्रूण संरक्षण’ के महत्व के प्रति जागरूक करें। यह जन-जागरूकता अभियान समाज के हर वर्ग तक पहुंचकर सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगा।

बाल लिंगानुपात का महत्व

भारत में बाल लिंगानुपात एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। लिंगानुपात में असंतुलन सामाजिक और जनसांख्यिकीय चुनौतियां पैदा करता है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाएं इस असंतुलन का मुख्य कारण हैं। इस समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम (PCPNDT Act) जैसे कानून बनाए हैं, जो अल्ट्रासाउंड मशीनों के दुरुपयोग और लिंग-चयन परीक्षण को प्रतिबंधित करते हैं। देहरादून प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम इन कानूनों के प्रवर्तन और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

समग्र सामाजिक विकास के लिए आवश्यक

एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए बेटियों का समान महत्व है। उन्हें शिक्षित और सशक्त बनाना न केवल उनके व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के समग्र विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ जैसे कार्यक्रम समाज में एक नई चेतना का संचार करेंगे और बेटियों को समाज की मुख्यधारा में समान स्थान दिलाने में मदद करेंगे।

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