आज कार्तिक पूर्णिमा पर क्यों मनाई जाती है देव दीपावली? जानिए इस पावन पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण मान्यताएँ
मुख्य संपादकप्रकाशित: 5 नवंबर 2025 | 07:35 AMअपडेट: 5 नवंबर 2025 | 07:36 AM1

वाराणसी-कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन देव दीपावली का पर्व मनाया जाता है, जिसे “देवों की दीपावली” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस शुभ दिन देवता स्वयं पृथ्वी पर उतरते हैं और गंगा तट पर दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। दिवाली के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से वाराणसी के घाटों पर हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है।
✨ देव दीपावली का कारण — भगवान शिव ने किया था त्रिपुरासुर वध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक दैत्य का वध किया था। इसी विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने काशी (वाराणसी) में दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसी परंपरा को देव दीपावली कहा गया। माना जाता है कि इस दिन दीपदान करने से पितरों की मुक्ति होती है और सौभाग्य फल की प्राप्ति होती है।
🪔 गंगा घाटों पर दीपों का महासमुद्र
देव दीपावली पर काशी के सभी घाट दीपों से जगमगा उठते हैं। गंगा आरती, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगम स्नान और दीपदान इस पर्व की मुख्य विशेषताएँ हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु वाराणसी और अन्य पवित्र स्थलों पर पहुँचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
🐟 भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार
इस दिन भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा हेतु मत्स्य अवतार लिया था। इसे विष्णु के दस अवतारों में पहला अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु मत्स्य रूप से बैकुंठ लौटते हैं।
🕯 सिख धर्म में भी विशेष महत्व — गुरु नानक देव जी का जन्म
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही प्रथम सिख गुरु गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। इस दिन गुरुपर्व मनाया जाता है। गुरुद्वारों में कीर्तन, प्रकाशोत्सव और लंगर का आयोजन होता है।
🌸 पुष्कर में ब्रह्माजी का अवतरण
एक मान्यता यह भी है कि कार्तिक पूर्णिमा को सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी का अवतरण पुष्कर के पवित्र सरोवर में हुआ था। इसलिए राजस्थान के पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है।
📅 तिथि (2025)
कार्तिक पूर्णिमा तिथि प्रारंभ:
04 नवंबर 2025 — सुबह 10:36 बजे
समापन:
05 नवंबर 2025 — शाम 06:48 बजे
उदया तिथि के आधार पर कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली 05 नवंबर (बुधवार) को मनाई जाएगी।
📌 निष्कर्ष
कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली केवल दीपों का उत्सव नहीं, बल्कि:
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भगवान शिव की विजय का प्रतीक है
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भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का स्मरण है
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गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व का दिन है
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ब्रह्माजी के सृजन दिवस का प्रतीक है
इस दिन दीपदान, स्नान, दान और पूजा को सौभाग्यवर्धक माना गया है।
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